राहगीरों और दुकानदारों की बढ़ी मुसीबतें, प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल

जलालगढ़ (पूर्णिया): वर्षा ऋतु का आगमन जहां एक ओर प्रकृति को संवारता है और किसानों के चेहरों पर खुशी लाता है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह आम नागरिकों के लिए किसी सजा से कम साबित नहीं होता। बिहार के पूर्णिया जिले के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक और व्यस्त व्यापारिक केंद्र जलालगढ़ बाजार से एक बेहद गंभीर और परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जलालगढ़ बस स्टैंड और रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के समीप भीषण जल जमाव (Waterlogging) की समस्या उत्पन्न हो गई है।

इस भयंकर जलभराव के चलते मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है और लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। सड़क पर जलमग्न हुए बड़े-बड़े गड्ढे किसी खूनी तालाब की तरह नजर आ रहे हैं, जिनमें वाहन रोजाना फंसकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों, स्कूली बच्चों, दैनिक यात्रियों और व्यापारियों का जीना मुहाल हो चुका है, लेकिन इस विकट परिस्थिति से निजात दिलाने के लिए स्थानीय प्रशासन और नगर निकाय की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

जलालगढ़ बस स्टैंड ओवरब्रिज के पास जमीनी हकीकत: जलभराव का तांडव

जलालगढ़ बस स्टैंड और ओवरब्रिज का यह क्षेत्र इस पूरे इलाके का मुख्य चौराहा और प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां से प्रतिदिन हजारों की संख्या में छोटे-बड़े व्यावसायिक वाहन, ऑटो, ट्रैक्टर, स्कूली बसें और राहगीर गुजरते हैं। लेकिन जल निकासी (Drainage System) के पूरी तरह से फेल हो जाने के कारण यह पूरा इलाका कृत्रिम झील में तब्दील हो चुका है।

सड़क का तालाब बनना: ओवरब्रिज के दोनों छोरों पर पानी इस कदर भर गया है कि सड़क का नामोनिशान ही छिप गया है। पानी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण बाइक और साइकिल सवार अक्सर पानी के बीच बने गहरे गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

यातायात का पूरी तरह चरमराना: भारी वाहनों के गुजरने से पानी की लहरें आसपास की दुकानों और मकानों के अंदर तक जा रही हैं। कई बार गाड़ियां बीच रास्ते में ही खराब होकर बंद हो जाती हैं, जिससे घंटों तक लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है।

संक्रामक बीमारियों का खतरा: लंबे समय तक पानी खड़े रहने के कारण उसमें सड़न पैदा होने लगी है, जिससे तीव्र दुर्गंध आ रही है। मच्छरों का प्रकोप बेकाबू हो चुका है और क्षेत्र में डायरिया, मलेरिया, डेंगू और त्वचा संबंधी गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।

स्कूली बच्चों की पीड़ा: सुबह-शाम स्कूल जाने वाले नन्हें बच्चों को इस गंदे और बदबूदार पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बच्चे पानी में गिरकर अपनी किताबें और यूनीफाम गंदा कर चुके हैं, जिससे अभिभावकों में भारी रोष है।

स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों का व्यवसाय चौपट

इस जलभराव की सबसे बड़ी मार ओवरब्रिज के आसपास अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले छोटे-बड़े दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ रही है। जलालगढ़ बाजार का यह हिस्सा व्यावसायिक रूप से सबसे सक्रिय माना जाता है, जहां रोज करोड़ों का कारोबार होता है।

"सड़क के सामने घुटने भर पानी भरा हुआ है। ऐसे में कौन ग्राहक हमारी दुकान तक आएगा? पिछले कई दिनों से हमारी बिक्री शून्य पर आ गई है। प्रशासन को कई बार गुहार लगाने के बाद भी सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है।" — स्थानीय दुकानदार

ग्राहकों की आवाजाही ठप: दुकान के बाहर गंदा पानी जमा होने के कारण ग्राहक दुकानों के पास रुकने से कतराते हैं। किराना, कपड़ा, और खान-पान की दुकानों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

सामानों के नुकसान की आशंका: गोदामों और दुकानों में नमी बढ़ने के कारण खाद्य पदार्थों और अन्य सामग्रियों के खराब होने का खतरा उत्पन्न हो गया है, जिससे व्यापारियों को आर्थिक मोर्चे पर भारी छति उठानी पड़ रही है।

नाला निर्माण और जल निकासी व्यवस्था की पोल

इस पूरी त्रासदी के मूल में स्थानीय स्तर पर जल निकासी के लिए बनाए गए नालों की बदहाली और उनकी नियमित साफ-सफाई का अभाव है।

अवरुद्ध और टूटे नाले: बस स्टैंड के आसपास जो भी थोड़े-बहुत नाले बनाए गए थे, वे या तो कचरे और प्लास्टिक से पूरी तरह चोक (Choked) हो चुके हैं या उनका निर्माण इस अवैज्ञानिक तरीके से किया गया है कि पानी आगे निकल ही नहीं पाता।

प्रशासनिक लापरवाही: हर साल बरसात के मौसम में यही स्थिति बनती है, और हर साल प्रशासन द्वारा केवल कागजी वादे किए जाते हैं। स्थायी समाधान के रूप में एक बड़े और सुव्यवस्थित नाले का निर्माण न कराए जाने के कारण जनता हर साल इस नर्क जैसी स्थिति को झेलने के लिए विवश है।

जनता की मांग और प्रशासनिक उत्तरदायित्व

जलालगढ़ के आक्रोशित नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने जिला प्रशासन और स्थानीय पंचायत/नगर प्रशासन से युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने की मांग की है।

तत्काल पंपिंग की व्यवस्था: मोटर और पंप लगाकर तुरंत इस जमा हुए पानी को सड़क से बाहर निकाला जाए ताकि आवागमन सुगम हो सके।

नालों की सफाई और डिसिल्टिंग: क्षेत्र के सभी छोटे-बड़े नालों की तत्काल सफाई कराई जाए ताकि बारिश का नया पानी आसानी से निकल सके।

सड़क की मरम्मत: पानी हटने के बाद सड़क पर बने खतरनाक गड्डों को भरकर तुरंत उसकी मरम्मत की जाए ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके।

जलालगढ़ बस स्टैंड ओवरब्रिज के निकट लगातार बारिश से उत्पन्न यह भीषण जलभराव केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की घोर विफलता का जीता-जागता प्रमाण है। जनता द्वारा टैक्स चुकाने और वोट देने के बावजूद यदि उन्हें घुटने भर गंदे पानी में जीने के लिए मजबूर होना पड़े, तो यह लोकतंत्र और विकास के दावों पर एक बड़ा तमाचा है। समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी वातानुकूलित कुर्सियों से बाहर निकलकर धरातल पर आएं और इस जानलेवा समस्या का एक स्थायी तथा प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें, ताकि जलालगढ़ की जनता राहत की सांस ले सके।