डॉ. मनीष की गिरफ्तारी के बाद EOU ने तेज की जांच, नेटवर्क और संपर्कों की गहन पड़ताल जारी

पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। इस मामले में आरोपी डॉ. मनीष की गिरफ्तारी के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। जांच एजेंसी अब आरोपी की पृष्ठभूमि, संपर्कों, वित्तीय लेन-देन, कॉल डिटेल्स और कथित नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।

सूत्रों के अनुसार, डॉ. मनीष मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले का निवासी है। जांच के दौरान एजेंसी उसके शैक्षणिक, पेशेवर और सामाजिक संपर्कों से जुड़ी जानकारी भी जुटा रही है। इसके साथ ही उन लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिनके साथ आरोपी के संपर्क होने की बात सामने आई है।

गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा

EOU अधिकारियों का मानना है कि कथित प्रश्नपत्र लीक मामले की पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कारण जांच एजेंसी मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कथित प्रश्नपत्र लीक की योजना कैसे बनाई गई, इसमें किन-किन लोगों की संभावित भूमिका रही और कथित तौर पर सूचना का आदान-प्रदान किस माध्यम से हुआ।

संपर्कों की खंगाली जा रही जानकारी

जांच के दौरान एजेंसी आरोपी के व्यक्तिगत और पेशेवर संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर कुछ व्यक्तियों से उसके परिचय और संपर्कों की जांच की जा रही है।

इसी क्रम में यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी का किन लोगों से संपर्क था और क्या उन संपर्कों का इस मामले से कोई संबंध है। फिलहाल जांच एजेंसियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।

तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों पर फोकस

EOU साइबर और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता से मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री, ई-मेल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य जांच को महत्वपूर्ण दिशा दे सकते हैं।

यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा सकती है और आवश्यकता पड़ने पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

वित्तीय लेन-देन की भी जांच

जांच एजेंसी आरोपी के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित परीक्षा अनियमितता से जुड़े किसी संदिग्ध आर्थिक लेन-देन के प्रमाण मिलते हैं या नहीं।

इसके अलावा यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के संकेत मिलते हैं तो उसकी भी जांच की जाएगी।

BPSC और शिक्षा विभाग की नजर

इस पूरे मामले पर बिहार लोक सेवा आयोग और संबंधित विभाग भी नजर बनाए हुए हैं। सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

अभ्यर्थियों में निष्पक्ष जांच की उम्मीद

TRE-3 परीक्षा में शामिल लाखों अभ्यर्थी इस मामले की जांच पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए ताकि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो।

कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच और कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

जांच में सामने आ सकते हैं नए तथ्य

जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ, डिजिटल विश्लेषण और दस्तावेजों की जांच के दौरान कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की जांच की दिशा तय होगी।

यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो जांच एजेंसी नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगी। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी ने मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच करने की बात कही है।

डॉ. मनीष की गिरफ्तारी के बाद BPSC TRE-3 के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच नए चरण में पहुंच गई है। आर्थिक अपराध इकाई आरोपी की पृष्ठभूमि, संपर्कों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों की व्यापक जांच कर रही है। हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी भी व्यक्ति की भूमिका या संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसे में मामले से जुड़ी सभी जानकारियां जांच पूरी होने तक प्रारंभिक मानी जाएंगी।