दान की गई भूमि के नामांतरण (म्यूटेशन) को लेकर शिक्षा परियोजना ने सभी बीईओ से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, तय समयसीमा में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
भागलपुर, मुख्य संवाददाता: राज्य के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी ढांचे के विकास, चारदीवारी निर्माण, खेल के मैदान के विस्तार और बच्चों के लिए शैक्षणिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के वास्ते भूमि की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दानदाताओं (भूमिदाताओं) द्वारा विद्यालयों के नाम पर जमीन दान तो कर दी जाती है, लेकिन प्रशासनिक और कागजी जटिलताओं के कारण समय पर उसका दाखिल-खारिज (नामांतरण/म्यूटेशन) नहीं हो पाता है। इस गंभीर प्रशासनिक अड़चन को दूर करने और स्कूलों की संपत्ति को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए भागलपुर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय तथा समग्र शिक्षा अभियान (शिक्षा परियोजना) ने एक कड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
हाल ही में शिक्षा परियोजना के अंतर्गत जिला कार्यालय से भागलपुर जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित किया गया है। इस पत्र के माध्यम से जिले भर के सभी प्रारंभिक और माध्यमिक विद्यालयों में दान में मिली भूमि के नामांतरण की अद्यतन स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट तलब की गई है। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द इस प्रक्रिया को पूरा कर विभाग को अवगत कराएं।
क्या है पूरा मामला और क्यों उठी इस रिपोर्ट की आवश्यकता?
विगत कुछ वर्षों में शिक्षा विभाग द्वारा यह लगातार देखा जा रहा था कि दानदाताओं द्वारा समाजहित और शिक्षा के प्रसार के लिए अपनी जमीनें सरकारी विद्यालयों के नाम दानपत्र (Gift Deed) या बैनामा के जरिए दी गई हैं। कागजों पर जमीन मिलने के बाद विभाग द्वारा वहां भवन निर्माण या अन्य विकास कार्य तो शुरू कर दिए जाते हैं, परंतु राजस्व अभिलेखों (Land Records) में स्कूल के नाम से वह जमीन दर्ज (म्यूटेशन) नहीं हो पाती है।
राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का नामांतरण न होने के कारण भविष्य में निम्नलिखित बड़ी समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है:
भूमि विवाद और अतिक्रमण की आशंका: म्यूटेशन न होने पर कई बार स्थानीय स्तर पर भू-माफियाओं या भूमिदाताओं के परिजनों द्वारा जमीन पर दावा ठोकने या अतिक्रमण करने की कोशिशें की जाती हैं, जिससे कानूनी विवाद पैदा होता है।
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में रुकावट: कई केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं (जैसे पीएम पोषण योजना शेड, अतिरिक्त वर्ग कक्ष निर्माण, स्मार्ट क्लास रूम आदि) ऐसी जमीनों पर शुरू करने में तकनीकी बाधाएं आती हैं जिनका म्यूटेशन क्लियर नहीं होता है।
संपत्ति की सुरक्षा का संकट: सरकारी धन से बनने वाले बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और स्वामित्व को पुख्ता करने के लिए भूमि का राजस्व दस्तावेजों में दर्ज होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
इन तमाम विसंगतियों और भविष्य की अदालती उलझनों से बचने के लिए ही जिला शिक्षा प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाते हुए प्रखंडवार समीक्षा शुरू कर दी है।
सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को जारी किए गए निर्देश
जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा भेजे गए पत्र में सभी बीईओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों की जमीनों की भौतिक और कागजी समीक्षा करें। पत्र में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है:
दान में मिली कुल भूमि का विवरण: प्रत्येक प्रखंड के अंतर्गत ऐसे कितने विद्यालय हैं, जहां स्थानीय दानदाताओं द्वारा जमीन दान दी गई है, उसकी कुल संख्या और रकबा (क्षेत्रफल) कितना है।
म्यूटेशन (नामांतरण) की वर्तमान स्थिति: दान में प्राप्त जमीनों में से कितनी जमीनों का दाखिल-खारिज अंचल कार्यालय (Circle Office) के माध्यम से पूरा हो चुका है और कितनी जमीनों का म्यूटेशन अभी भी लंबित (Pending) है।
लंबवत मामलों के कारण: जिन विद्यालयों की भूमि का नामांतरण अभी तक नहीं हो पाया है, उसके पीछे क्या प्रशासनिक या कागजी अड़चनें (जैसे दस्तावेजों की कमी, आपसी विवाद आदि) आ रही हैं, इसका स्पष्ट कारण।
अंचल अधिकारियों (CO) के साथ समन्वय: सभी बीईओ को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र के अंचल अधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करवाएं, ताकि शत-प्रतिशत विद्यालयों की जमीन कानूनी रूप से विभाग के नाम दर्ज हो सके।
शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समितियों पर भी बढ़ी जिम्मेदारी
इस निर्देश के बाद भागलपुर के सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों (Headmasters) और विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों की सक्रियता भी बढ़ गई है। शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने विद्यालय से संबंधित दानपत्र की मूल प्रतियां, केवाला, और रसीद से जुड़े दस्तावेज तुरंत प्रखंड शिक्षा कार्यालय को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते कागजी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके। कई स्कूलों में प्रधानाध्यापक स्थानीय राजस्व कर्मचारियों (Halkawaris) के संपर्क में रहकर फाइलों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
प्रशासनिक सख्ती से भविष्य में मिलेगा लाभ
शिक्षाविदों और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय का यह कदम बेहद सराहनीय और दूरदर्शी है। समय रहते यदि दान की गई जमीनों का म्यूटेशन नहीं कराया जाता है, तो आने वाले समय में सरकारी संपत्तियों पर संकट गहरा सकता है। इस रिपोर्ट के तलब किए जाने और तय समयसीमा में काम पूरा कराने के आदेश से प्रशासनिक सुस्ती टूटेगी और सरकारी जमीनों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
भागलपुर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय द्वारा शिक्षा परियोजना के तहत सभी बीईओ को दान में दी गई भूमि के नामांतरण की रिपोर्ट मांगने और जल्द प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश प्रशासनिक सुशासन की एक मजबूत मिसाल है। यह पहल न केवल शिक्षा विभाग की संपत्तियों को सुरक्षित करेगी, बल्कि भविष्य में स्कूलों के विकास कार्यों में आने वाली सभी बाधाओं को हमेशा के लिए समाप्त कर देगी।