बिहार विधान परिषद में गूँजा शिक्षा विभाग का मुद्दा: बीआरएबीयू में धांधली और वित्तीय अनियमितता पर सरकार से जवाब-तलब

बिहार विधान परिषद के हालिया सत्र के दौरान शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी अव्यवस्थाओं ने सदन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। विशेष रूप से बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में पैट (PAT - Ph.D. Admission Test) के रिजल्ट में बार-बार बदलाव और नए डिग्री कॉलेजों में सेवानिवृत्त (रिटायर) होने वाले शिक्षकों के अनुचित तबादलों का मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहा। इसके अतिरिक्त, कैग (CAG - Comptroller and Auditor General) की रिपोर्ट के हवाले से वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य मुद्दा 1: पैट (PAT) रिजल्ट में तीन बार बदलाव

BRABU में पैट प्रवेश परीक्षा के परिणाम में तीन बार किए गए बदलाव ने विश्वविद्यालय की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गहरा प्रहार किया है। सदन में सदस्यों ने आरोप लगाया कि:

प्रक्रिया में संदिग्धता: एक ही परीक्षा के रिजल्ट को तीन बार बदलना प्रशासनिक अराजकता को दर्शाता है।

छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़: बार-बार रिजल्ट बदलने से छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बनी है और उनकी शैक्षणिक प्रगति बाधित हुई है।

दोषियों पर कार्रवाई: सदस्यों ने मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच हो और इसमें शामिल अधिकारियों/शिक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।

मुख्य मुद्दा 2: सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों का तबादला

नया मुद्दा जो सदन में चर्चा का विषय बना, वह नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के तबादले से जुड़ा है। सदस्यों ने सवाल उठाया कि:

असंगत तबादले: ऐसे शिक्षकों का उन कॉलेजों में तबादला करना, जो जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं, समझ से परे है।

वित्तीय और प्रशासनिक प्रभाव: इससे संबंधित कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है। सदस्यों ने तर्क दिया कि यह तबादला नीति पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण है और इसमें निहित स्वार्थों की बू आ रही है।

मुख्य मुद्दा 3: कैग रिपोर्ट और वित्तीय अनियमितता

सबसे गंभीर आरोप कैग की उस रिपोर्ट के आधार पर लगाए गए, जिसमें विश्वविद्यालय और संबंधित शिक्षा विभागों में बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली की बात कही गई है।

फंड का दुरुपयोग: कैग रिपोर्ट के अनुसार, जो सरकारी राशि छात्रों की सुविधाओं और शैक्षणिक विकास के लिए थी, उसका अन्य मदों में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है।

छात्रों से अवैध वसूली: सदस्यों ने आरोप लगाया कि छात्रों से विभिन्न मदों के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन इसे प्रशासनिक शुल्क बताकर पल्ला झाड़ रहा है।

ऑडिट की अनदेखी: वर्षों से लंबित ऑडिट रिपोर्टों पर कोई ठोस कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि संस्थान में 'सब कुछ ठीक नहीं है'।

सदन में सदस्यों की नाराजगी

विधान परिषद के सदस्यों ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि शिक्षा विभाग का "सुशासन" कहाँ है? यदि राज्य के बड़े विश्वविद्यालय ही भ्रष्टाचार और अनियमितता के गढ़ बन जाएंगे, तो बिहार के छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। सदस्यों ने जोर देकर कहा कि:

शिक्षा विभाग को केवल फाइलों में सुधार नहीं, बल्कि धरातल पर कड़े कदम उठाने होंगे।

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता का अर्थ 'भ्रष्टाचार की छूट' नहीं है।

सरकार का रुख और भविष्य की कार्रवाई

सदन में हंगामे और सवालों के दबाव के बाद, सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि:

जांच समिति का गठन: पैट रिजल्ट मामले में एक विशेष जांच समिति का गठन किया जाएगा जो 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देगी।

तबादला नीति की समीक्षा: जो तबादले विवादास्पद पाए जाएंगे, उन्हें रद्द करने या पुनर्विचार करने पर विचार किया जाएगा।

वित्तीय ऑडिट: कैग की रिपोर्ट पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मुजफ्फरपुर स्थित बीआरएबीयू की यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय की समस्या नहीं है, बल्कि यह बिहार के उच्च शिक्षा प्रणाली में व्याप्त गहरी जड़ों वाली समस्याओं का प्रतिबिंब है। विधान परिषद में सदस्यों द्वारा उठाए गए ये मुद्दे सरकार के लिए एक चेतावनी हैं। यदि इन पर त्वरित और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता गिरेगी, बल्कि राज्य की प्रशासनिक साख पर भी गहरा धब्बा लगेगा।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार की ओर से गठित समितियां केवल कागजी खानापूर्ति करेंगी या वास्तव में विश्वविद्यालय प्रशासन में सुधार के कड़े कदम उठाए जाएंगे।