डयूटी से गायब मिले अधीक्षक, प्रबंधक और महिला डॉक्टर; वेतन रोकने और स्पष्टीकरण का सख्त आदेश
सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के दावों को मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के डॉक्टरों और अधिकारियों ने तार-तार कर दिया है। रविवार की सुबह जैसे ही जिलाधिकारी कुमार गौरव अचानक बिना ताम-झाम और बिना किसी सुरक्षा काफिले के साधारण तरीके से सदर अस्पताल के ओपीडी (OPD), इमरजेंसी वार्ड और प्रसव कक्ष (Labor Room) का निरीक्षण करने पहुंचे, वहां हड़कंप मच गया।
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल के सर्वेसर्वा यानी अस्पताल अधीक्षक (Hospital Superintendent), अस्पताल प्रबंधक (Hospital Manager) और प्रसव वार्ड में तैनात मुख्य महिला चिकित्सक डॉ. मोनिका जायसवाल अपनी आधिकारिक डयूटी टाइमिंग के बावजूद मौके से पूरी तरह नदारद (गायब) थे। मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई थीं और डॉक्टर साहबान नदारद थे। इस घोर लापरवाही को देखते हुए डीएम कुमार गौरव का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने ऑन-द-स्पॉट (On-the-Spot) कड़ा एक्शन लेते हुए सभी दोषी अधिकारियों और डॉक्टर का वेतन रोकने (Salary Hold) और 24 घंटे के भीतर शो-कॉज (स्पष्टीकरण) जारी करने का कड़ा आदेश दे दिया।
रविवार सुबह 'मिशन सदर अस्पताल': जब मरीज बनकर पहुंचे डीएम
आमतौर पर वीआईपी दौरों की जानकारी अस्पतालों को पहले से होती है, जिससे वे सब कुछ चकाचक कर लेते हैं। लेकिन रविवार की सुबह डीएम कुमार गौरव ने बिल्कुल अलग रणनीति अपनाई। वे सुबह करीब 9:15 बजे एक आम नागरिक की तरह अस्पताल परिसर में दाखिल हुए।
औचक निरीक्षण की कड़वी हकीकत:
रजिस्टर खाली, चैंबरों में लटका था ताला: डीएम सबसे पहले डॉक्टरों के हाजिरी रजिस्टर (Attendance Register) की जांच करने पहुंचे, तो वहां न तो अधीक्षक के हस्ताक्षर थे और न ही अस्पताल प्रबंधक के। जब वे उनके कमरों की तरफ बढ़े, तो वहां ताला लटका हुआ मिला।
मरीजों का रोना: दूर-दराज के गांवों से आए गरीब मरीज और गर्भवती महिलाएं तड़के 7 बजे से ही डॉक्टरों के इंतजार में बैठे थे। प्रसव वार्ड (Maternity Ward) के बाहर महिला मरीजों की स्थिति बेहद दयनीय थी, क्योंकि वहां तैनात महिला डॉक्टर डॉ. मोनिका जायसवाल अपनी डयूटी शिफ्ट शुरू होने के दो घंटे बाद तक अस्पताल नहीं पहुंची थीं।
कौन-कौन से बड़े चेहरों पर गिरी गाज?
जिलाधिकारी ने अस्पताल में मौजूद अन्य जूनियर कर्मचारियों और उपाधीक्षक को तलब किया और ऑन-ड्यूटी गायब रहने वाले अधिकारियों की सूची तैयार करवाई। इस बड़ी कार्रवाई की जद में सदर अस्पताल के तीन सबसे मुख्य स्तंभ आए हैं:
अस्पताल अधीक्षक (Hospital Superintendent): जिन पर पूरे अस्पताल की प्रशासनिक और चिकित्सा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी है, वे खुद ही डयूटी से गायब थे।
अस्पताल प्रबंधक (Hospital Manager): जिनका काम रोजमर्रा की साफ-सफाई, सुरक्षा और डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है, वे भी अपने दफ्तर से नदारद पाए गए।
डॉ. मोनिका जायसवाल (महिला चिकित्सक): प्रसव और महिला रोग विभाग जैसी अति-संवेदनशील डयूटी पर तैनात होने के बावजूद समय पर उपस्थित न होने के कारण उन पर सबसे सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
डीएम कुमार गौरव का कड़ा रुख: "मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं"
निरीक्षण के बाद मीडिया और अधीनस्थ अधिकारियों से बात करते हुए जिलाधिकारी कुमार गौरव ने बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार डॉक्टरों को मोटी तनख्वाह और सुविधाएं इसलिए देती है ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब व्यक्ति को मुफ्त और त्वरित इलाज मिल सके।
जिलाधिकारी का आधिकारिक बयान: "यह बेहद शर्मनाक और असहनीय है कि जिला स्तर के मुख्य अस्पताल में वरिष्ठ अधिकारी और डॉक्टर ही समय का पालन नहीं कर रहे हैं। आपातकालीन सेवाओं और महिला वार्ड में डॉक्टरों का न होना किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा है। मैंने तत्काल प्रभाव से अस्पताल अधीक्षक, प्रबंधक और डॉ. मोनिका जायसवाल का अगले आदेश तक वेतन रोकने का निर्देश जारी कर दिया है। इसके साथ ही इन सभी से 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो इनके निलंबन (Suspension) और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति को पत्र भेजा जाएगा।"
डेटा शीट: मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल निरीक्षण रिपोर्ट
| अधिकारी/कर्मचारी का नाम | पदनाम | निरीक्षण के समय स्थिति | प्रशासनिक कार्रवाई |
|---|---|---|---|
| वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी | अस्पताल अधीक्षक | डयूटी से अनुपस्थित (ताला बंद) | वेतन फ्रीज, शो-कॉज नोटिस |
| प्रशासनिक प्रभारी | अस्पताल प्रबंधक | डयूटी से पूरी तरह गायब | तत्काल वेतन रोक, स्पष्टीकरण |
| डॉ. मोनिका जायसवाल | महिला चिकित्सक (Maternity) | प्रसव वार्ड से नदारद | वेतन पर रोक, विभागीय जांच |
अस्पताल में अन्य कमियां भी आईं सामने: स्वच्छता और दवाओं पर खिंचाई
सिर्फ डॉक्टरों की अनुपस्थिति ही नहीं, बल्कि डीएम के इस 2 घंटे लंबे निरीक्षण में सदर अस्पताल की कई अन्य बुनियादी कमियां भी उजागर हुईं:
गंदगी का अंबार: अस्पताल के शौचालयों (Toilets) और वार्डों के कोनों में गंदगी पसरी हुई थी, जिस पर डीएम ने सफाई एजेंसी का टेंडर रद्द करने की चेतावनी दी।
दवाइयों की किल्लत: कुछ मरीजों ने डीएम से सीधे शिकायत की कि उन्हें बाहर की दवाइयां लिखी जा रही हैं। इस पर डीएम ने इन-हाउस सरकारी दवा काउंटर (Counter) के स्टॉक रजिस्टर की जांच की और काउंटर प्रभारी को फटकार लगाते हुए सभी जरूरी दवाएं अस्पताल के भीतर से ही मुफ्त उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
मुजफ्फरपुर के नवनियुक्त डीएम कुमार गौरव का यह कड़ा तेवर साफ संदेश देता है कि जिले में अब 'रद्दी पुलिसिंग और सुस्त प्रशासनिक कल्चर' नहीं चलेगा। सरकारी डॉक्टरों द्वारा निजी क्लिनिकों में समय बिताने और सरकारी डयूटी से गायब रहने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। इस औचक निरीक्षण और सामूहिक रूप से वेतन रोकने की कार्रवाई से पूरे जिले के सरकारी विभागों में खलबली मच गई है। अब देखना यह है कि इस कड़े सबक के बाद क्या मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल की व्यवस्था में कोई स्थाई सुधार आता है या नहीं।