जिला प्रशासन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक; मातहत पदाधिकारियों को दिए समस्याओं के त्वरित समाधान के सख्त निर्देश, कार्यों में अनावश्यक विलंब या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

भागलपुर: जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त, पारदर्शी और जन-उन्मुख बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार समीक्षा बैठकों का दौर जारी है। इसी क्रम में हाल ही में जिला मुख्यालय स्थित सभागार में आयोजित एक उच्चस्तरीय एवं बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व ने अपने मातहत (अधीनस्थ) पदाधिकारियों को दो टूक शब्दों में कड़ी चेतावनी दी है। बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि जनता की समस्याओं, शिकायतों और विकास योजनाओं से जुड़ी फाइलों के निष्पादन में किसी भी प्रकार का अनावश्यक विलंब या कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान ही प्रशासन की पहली प्राथमिकता

समीक्षा बैठक की शुरुआत करते हुए जिला प्रशासन के मुखिया ने तमाम विभागीय अधिकारियों को यह भली-भांति याद दिलाया कि एक सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए कड़े शब्दों में कहा गया कि जब आम नागरिक अपनी किसी शिकायत, पीड़ा या बुनियादी समस्या को लेकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, तो उनकी उम्मीदें सीधे तौर पर प्रशासनिक अमले से जुड़ी होती हैं। ऐसे में फाइलों को अनावश्यक रूप से लटकाए रखना, आवेदनों को दबा कर रखना या जनता की शिकायतों के प्रति उदासीन रवैया अपनाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हर अधिकारी और कर्मचारी की यह नैतिक और पेशेवर जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले मामलों का न्यायसंगत और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।

समीक्षा बैठक में उठाए गए प्रमुख और संवेदनशील बिंदु

बैठक के दौरान जिले के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की एक-एक कर गहन समीक्षा की गई। इस दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया:

लंबित मामलों (पेंडेंसी) का शून्य होना: अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि उनके कार्यालय की टेबलों पर कोई भी आवेदन या फाइल निर्धारित समयसीमा से अधिक दिनों तक लंबित नहीं रहनी चाहिए। पेंडेंसी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

विकास और निर्माण योजनाओं की मॉनिटरिंग: ग्रामीण विकास, प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना, सड़कों के निर्माण, नल-जल योजना और स्वास्थ्य व शिक्षा से जुड़ी चल रही विभिन्न परियोजनाओं की जमीनी हकीकत की रिपोर्ट तलब की गई। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि सभी योजनाएं गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा के भीतर पूरी हों।

जनशिकायत निवारण तंत्र की मजबूती: मुख्यमंत्री जनता के दरबार, जिला लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम और अन्य माध्यमों से प्राप्त होने वाली शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर गुणवत्तापूर्ण निबटारा करने के निर्देश दिए गए, ताकि फरियादियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर गिरेगी गाज

बैठक में सबसे सख्त रुख अनुशासन, समय की पाबंदी और कार्य संस्कृति को लेकर अपनाया गया। अधिकारियों को चेतावनी देते हुए यह साफ कर दिया गया कि औचक निरीक्षण के दौरान यदि किसी कार्यालय में कार्य संस्कृति में ढिलाई, अनाधिकृत अनुपस्थिति या जनता के प्रति उदासीनता पाई गई, तो संबंधित प्रभारी और लापरवाह कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।

शीर्ष अधिकारियों ने सभी जिला और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को यह हिदायत दी कि वे केवल दफ्तर की चारदीवारी तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से अपने-अपने कार्यालयों का आंतरिक निरीक्षण करें और मैदानी स्तर पर फील्ड विजिट (क्षेत्रीय दौरा) बढ़ाएं। इससे न केवल योजनाओं की जमीनी हकीकत का सीधा आकलन होगा, बल्कि मैदानी अमले पर भी कार्यकुशलता बनाए रखने का दबाव रहेगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि अब हर महीने सभी विभागों के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट का मूल्यांकन किया जाएगा और खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

प्रशासनिक मशीनरी में सुधार और जनता का बढ़ेगा विश्वास

प्रशासनिक गलियारों में इस प्रकार की सख्ती और स्पष्ट संदेश के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी कार्यालयों की कार्यशैली में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा। मामलों के समय पर और पारदर्शी तरीके से निबटारे से एक ओर जहां आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर शासन और जनता के बीच की दूरियां कम होंगी और व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और अधिक मजबूत होगा।

मातहत पदाधिकारियों को दिए गए ये कड़े निर्देश इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि जिला प्रशासन अब किसी भी प्रकार की सुस्ती, प्रशासनिक सुस्ती या कार्य में लापरवाही के मूड में नहीं है। "अनावश्यक विलंब या लापरवाही अस्वीकार्य है" का यह सख्त संदेश यदि पूरी ईमानदारी से धरातल पर क्रियान्वित हुआ, तो निस्संदेह भागलपुर जिले में विकास की रफ्तार और अधिक तेज होगी तथा जनहित से जुड़े कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ समय पर मुकम्मल हो सकेंगे।