डीआईजी चंदन कुशवाहा ने भेजी अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा, निरीक्षण में शिथिलता और शराबबंदी लागू कराने में लापरवाही का खुलासा

महुआ/हाजीपुर (वैशाली): भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा में अनुशासन, सतर्कता और अपने कार्यक्षेत्र के प्रति पूर्ण निष्ठा किसी भी अधिकारी की सबसे बड़ी कसौटी होती है। जब एक पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी (SDPO) जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पद पर बैठा व्यक्ति अपने दायित्वों के निर्वहन में कोताही बरतता है, तो न केवल उस पूरे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था चरमराने लगती है, बल्कि आम नागरिकों का पुलिस तंत्र से विश्वास भी डगमगाने लगता है। बिहार के वैशाली जिले के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण और सामरिक रूप से संवेदनशील महुआ अनुमंडल से पुलिस महकमे को हिला देने वाली एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर खबर सामने आ रही है। महुआ के एसडीपीओ संजीव कुमार की कार्यशैली में उच्च स्तरीय जांच के दौरान गंभीर लापरवाही पाई गई है।

इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तिरहुत क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) चंदन कुशवाहा ने वैशाली के इस चर्चित अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनिक कार्रवाई (Disciplinary Action) करने के लिए आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है। विभागीय जांच के दौरान महुआ अनुमंडल कार्यालय और थानों के कामकाज में कई गंभीर खामियां और अनियमितताएं सामने आईं, जिसमें विशेष तौर पर थानों के निरीक्षण में बरती गई शिथिलता और महुआ क्षेत्र में शराबबंदी (Prohibition) के नियमों को सख्ती से लागू कराने में नाकामी का बड़ा खुलासा हुआ है। इस प्रशासनिक कदम के बाद से पुलिस मुख्यालय से लेकर स्थानीय महकमे तक भारी खलबली मची हुई है।

जांच में उजागर हुईं गंभीर खामियां और शिथिलता

प्राप्त प्रशासनिक विवरणों के अनुसार, पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) कार्यालय द्वारा महुआ अनुमंडल पुलिस कार्यालय और उसके अधीन आने वाले विभिन्न थानों के कामकाज की पिछले दिनों गुप्त और औपचारिक समीक्षा की गई थी। इस उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग और मैदानी निरीक्षण के दौरान एसडीपीओ संजीव कुमार की कार्यप्रणाली पर कई बड़े प्रश्नचिह्न खड़े हुए।

निरीक्षण कार्यों में भारी उदासीनता: नियमानुसार हर एसडीपीओ को समय-समय पर अपने क्षेत्र के थानों का भौतिक सत्यापन, मालखाना जांच, गुंडा पंजी का अवलोकन और लंबित कांडों (Pending Cases) की समीक्षा करनी होती है। लेकिन जांच में यह पाया गया कि संजीव कुमार द्वारा थानों के नियमित और प्रभावी निरीक्षण में गंभीर शिथिलता बरती गई, जिससे थानों के पुलिसकर्मियों पर प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर हो गया।

शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में लापरवाही: बिहार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार 'पूर्ण शराबबंदी' को अपने क्षेत्र में प्रभावी ढंग से लागू कराना और अवैध शराब के धंधेबाजों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करना अनुमंडल पुलिस अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। महुआ क्षेत्र से लगातार मिल रही शिकायतों और समीक्षा में यह तथ्य उजागर हुआ कि वहां शराब तस्करों पर नकेल कसने में अपेक्षित मुस्तैदी नहीं दिखाई गई।

अपराध नियंत्रण और पर्यवेक्षण में ढिलाई: गंभीर आपराधिक मामलों (जैसे लूट, हत्या, और अन्य संगीन अपराध) के उद्भेदन और समय पर पर्यवेक्षण (Supervision) रिपोर्ट समर्पित करने में भी अनावश्यक विलंब किए जाने की बात जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज की गई है।

"पुलिस सेवा में लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं है। यदि मैदानी स्तर पर अधिकारी ही अपने निरीक्षण और शराबबंदी जैसे कानूनों के प्रति ढुलमुल रवैया अपनाएंगे, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे। महुआ एसडीपीओ के मामले में सभी साक्ष्यों के आधार पर अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की गई है।" — उच्च प्रशासनिक सूत्र, पुलिस उप-महानिरीक्षक कार्यालय

डीआईजी चंदन कुशवाहा का कड़ा रुख और प्रशासनिक संदेश

तिरहुत डीआईजी चंदन कुशवाहा के इस कड़े कदम से यह साफ हो गया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस मुख्यालय किसी भी स्तर की प्रशासनिक लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया: डीआईजी द्वारा भेजे गए पत्र के बाद अब गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के स्तर पर एसडीपीओ संजीव कुमार से स्पष्टीकरण मांगते हुए विभागीय कार्यवाही (Departmental Proceeding) को आगे बढ़ाया जाएगा। इस कार्रवाई के तहत उन्हें निलंबित किए जाने या अन्य प्रशासनिक दंड दिए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।

मैदानी अधिकारियों को कड़ी चेतावनी: इस एक बड़े प्रशासनिक एक्शन ने तिरहुत रेंज के अन्य सभी अनुमंडलों और थानों के अधिकारियों को भी यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि उनके कार्यक्षेत्र में शराब का अवैध कारोबार या निरीक्षण में कोताही पाई गई, तो गाज उनके ऊपर भी गिर सकती है।

महुआ क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और जनता की प्रतिक्रिया

महुआ अनुमंडल में पिछले कुछ महीनों से आपराधिक वारदातों और शराब तस्करों की सक्रियता को लेकर स्थानीय स्तर पर भी तरह-तरह की चर्चाएं थीं। आम जनता का मानना है कि यदि उच्चाधिकारियों द्वारा इस प्रकार की समय पर और सख्त जांच न कराई जाए, तो स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत का तंत्र मजबूत हो जाता है।

सख्त कार्रवाई की मांग: स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने डीआईजी के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि केवल पत्र भेजने तक ही नहीं, बल्कि दोषियों पर धरातल पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए ताकि पुलिसिया तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

सुधार की आस: जनता को अब यह उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद महुआ अनुमंडल के पुलिस प्रशासन में कसावट आएगी और अपराधियों तथा शराब माफियाओं पर पुलिस का शिकंजा कस सकेगा।

महुआ के एसडीपीओ संजीव कुमार की कार्यशैली में पाई गई गंभीर लापरवाही और डीआईजी चंदन कुशवाहा द्वारा उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए भेजा गया पत्र यह साबित करता है कि शासन प्रणाली में जवाबदेही की संस्कृति अब सर्वोपरि है। थानों के निरीक्षण में शिथिलता और शराबबंदी जैसे संवेदनशील कानून के पालन में कोताही किसी भी पुलिस अधिकारी के करियर पर भारी पड़ सकती है। यह घटना वैशाली जिले के पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है और यह स्पष्ट संदेश देती है कि खाकी की गरिमा और कानून के राज से खिलваड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।