यूजी पार्ट टू और पार्ट थ्री स्पेशल परीक्षा की तिथि जल्द घोषित करने की मांग हुई मुखर, छात्रों में आक्रोश
पूर्णिया: उच्च शिक्षा की धुरी माने जाने वाले विश्वविद्यालयों में सत्र का समय पर चलना और समयबद्ध तरीके से परीक्षाओं का आयोजन होना विद्यार्थियों के भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जब परीक्षाएं विलंबित होती हैं या विशेष परीक्षाओं (Special Examinations) के परिणाम और आयोजन में अनावश्यक देरी होती है, तो छात्र-छात्राओं का अकादमिक और पेशेवर जीवन संकट में पड़ जाता है। बिहार के सीमांचल क्षेत्र के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान पूर्णिया विश्वविद्यालय से एक बार फिर विद्यार्थियों के असंतोष और उनकी जायज मांगों को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं और छात्र संगठनों द्वारा यूजी (स्नातक) पार्ट टू एवं पार्ट थ्री की स्पेशल परीक्षा की तिथि अविलंब घोषित करने की मांग को लेकर स्वर मुखर कर दिए गए हैं।
विद्यार्थियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली और लचर व्यवस्था के कारण उनके सत्र पहले से ही पिछड़ रहे हैं, और जिन छात्रों का किसी कारणवश पूर्व की परीक्षाओं में परिणाम लंबित रह गया था या वे अनुपस्थित रहे थे, उनके लिए विशेष परीक्षा का आयोजन न होना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इस मांग को लेकर छात्र लगातार गोलबंद हो रहे हैं और विश्वविद्यालय परिसर में विरोध-प्रदर्शन की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
स्पेशल परीक्षा की मांग क्यों है जरूरी?
स्नातक द्वितीय खंड (Part 2) और तृतीय खंड (Part 3) किसी भी छात्र के ग्रेजुएशन के वे चरण हैं, जिनके बाद उन्हें उच्च शिक्षा (जैसे पोस्ट ग्रेजुएशन) या विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) में हिस्सा लेना होता है।
करियर की अनिश्चितता: जिन विद्यार्थियों का रिजल्ट प्रमोटेड (Promoted) या फेल (Failed) आया था या जो किसी अपरिहार्य कारणों से परीक्षा छूटने की वजह से परेशान थे, वे इस स्पेशल परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। परीक्षा न होने से वे आगे के सेमेस्टर या मास्टर डिग्री में एडमिशन नहीं ले पा रहे हैं।
समय की बर्बादी: छात्रों का कहना है कि एक-एक साल सत्र पीछे होने से न केवल उनका मानसिक सुकून छिन रहा है, बल्कि रोजगार के अवसरों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
पूर्व के आश्वासनों का पूरा न होना: छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग द्वारा पूर्व में यह भरोसा दिलाया गया था कि जल्द ही विशेष परीक्षाओं की रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
छात्र संगठनों की चेतावनी और आंदोलन की रूपरेखा
विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर परीक्षा नियंत्रक द्वारा यूजी पार्ट टू और पार्ट थ्री स्पेशल परीक्षा की तिथि घोषित नहीं की जाती है, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
"हम लगातार विश्वविद्यालय के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। हमारे भविष्य के साथ यह खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन तुरंत स्पेशल परीक्षा का शेड्यूल जारी करे, अन्यथा छात्र सड़क पर उतरकर तालाबंदी करने को मजबूर होंगे।" — छात्र नेता, पूर्णिया विश्वविद्यालय
ज्ञापन सौंपने का सिलसिला: छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक को मांग पत्र सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया है।
बढ़ता रोष: पूर्णिया कॉलेज, महिला कॉलेज और अन्य संबंद्ध महाविद्यालयों के छात्र इस मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक मशीनरी पर दबाव काफी बढ़ गया है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और विश्वविद्यालय की मजबूरी
विश्वविद्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि परीक्षा विभाग कॉपियों के मूल्यांकन, अन्य सत्रों की नियमित परीक्षाओं (जैसे वर्तमान सेमेस्टर परीक्षाएं) और लॉजिस्टिक की व्यस्तता के कारण थोड़ा समय मांग रहा है। हालांकि, छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए आंतरिक स्तर पर मंथन शुरू हो चुका है।
संभावित विचार: विश्वविद्यालय प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि जुलाई-अगस्त के दौरान अन्य परीक्षाओं के बीच ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था निकालकर स्पेशल परीक्षाओं के फॉर्म और डेटशीट जारी की जाए।
कैलेंडर को दुरुस्त करने का दबाव: कुलपति कार्यालय पर सत्र को नियमित करने का भारी दबाव है, क्योंकि यूजी और पीजी दोनों स्तरों पर विलंब की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
निष्कर्ष
पूर्णिया विश्वविद्यालय में यूजी पार्ट टू एवं पार्ट थ्री स्पेशल परीक्षा की तिथि जल्द घोषित करने की मांग का इस प्रकार मुखर होना इस बात का प्रमाण है कि छात्र अब अपनी शिक्षा और भविष्य को लेकर जागरूक और आक्रामक हो चुके हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए यह समय टालमटोल करने का नहीं, बल्कि त्वरित और पारदर्शी निर्णय लेने का है। यदि समय रहते स्पेशल परीक्षा की तिथि घोषित नहीं की गई, तो यह असंतोष एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले सकता है। पूर्णिया विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा इसी में है कि वह छात्रों की इस अकादमिक मांग को प्राथमिकता देते हुए अविलंब परीक्षा कार्यक्रम जारी करे।