सहरसा में 'मौत की सड़कें': तेज रफ्तार और अवैध कट के कारण बढ़ रही दुर्घटनाएं, प्रशासन मौन
सहरसा: कोसी के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले सहरसा जिले में सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। एनएच 327ई (NH 327E) और एनएच 107 (NH 107) जैसी प्रमुख जीवन रेखाएं आज 'मौत की सड़कें' बनती जा रही हैं। पिछले कुछ समय में इन सड़कों पर हुई दुर्घटनाओं ने न केवल दर्जनों परिवारों को उजाड़ा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और सड़कों पर बने अवैध कट हादसों का मुख्य कारण बन रहे हैं।
दुर्घटनाओं के मुख्य कारण: एक विश्लेषण
सहरसा में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:
तेज रफ्तार और लापरवाही: सड़कों के चौड़ीकरण के बाद वाहनों की गति अनियंत्रित हो गई है। एनएच 107 पर भारी वाहनों और छोटी गाड़ियों का तेज गति से चलना आम है, जिससे दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
अवैध कट (Illegal Cuts): एनएच 327ई और एनएच 107 पर जगह-जगह अवैध कट बना दिए गए हैं। ये कट बिना किसी सुरक्षा मानक के बनाए गए हैं, जहां से अचानक वाहन मुख्य सड़क पर आ जाते हैं, जिससे तेज गति से आ रहे वाहनों के साथ टक्कर होना स्वाभाविक हो जाता है।
गलत तरीके से बने स्पीड ब्रेकर: सड़कों पर सुरक्षा के लिए बनाए गए स्पीड ब्रेकर अक्सर वैज्ञानिक मानकों (Scientific Norms) का पालन नहीं करते। कहीं ये बहुत ऊंचे हैं तो कहीं बिना किसी चेतावनी चिन्ह (Signage) के बने हैं, जो खुद दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
यातायात नियमों का उल्लंघन: बिना हेलमेट बाइक चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और ओवरलोडिंग सहरसा की सड़कों पर आम बात है। इन नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई सख्त अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
प्रमुख सड़कों की बदहाली
एनएच 327ई और एनएच 107 की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। इन मार्गों पर गुजरने वाले यात्री अक्सर बताते हैं कि सड़क के किनारे अतिक्रमण और अवैध कटों की भरमार ने ड्राइविंग को जोखिम भरा बना दिया है। सड़क निर्माण के समय जिन सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना चाहिए था, उन्हें बाद में व्यावसायिक हितों के लिए तोड़ दिया गया। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों ने अपनी सुविधा के लिए सड़क के बीच डिवाइडर या किनारे को तोड़कर अवैध रास्ते बना लिए हैं।
प्रशासन और पुलिस की उदासीनता
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस और परिवहन विभाग केवल दुर्घटना के बाद मुआवजे या एफआईआर की खानापूर्ति करते हैं। यदि समय रहते इन अवैध कटों को बंद कर दिया जाए और स्पीड ब्रेकरों को मानक के अनुरूप बनाया जाए, तो सैकड़ों जान बचाई जा सकती हैं। सड़कों पर 'ब्लैक स्पॉट' (Black Spots) की पहचान करने के बाद भी उन पर आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
क्या हो समाधान?
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इन दुर्घटनाओं को कम करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने आवश्यक हैं:
अवैध कटों का चिह्नीकरण और स्थायी समाधान: जिला प्रशासन को एनएचएआई (NHAI) के साथ मिलकर सभी अवैध कटों को तुरंत बंद करना चाहिए।
मानक स्पीड ब्रेकर और साइनबोर्ड: सभी स्पीड ब्रेकरों को आईआरसी (IRC) मानकों के अनुरूप बनाया जाए और उन पर रिफ्लेक्टिव पेंट और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
सघन चेकिंग अभियान: हेलमेट, सीट बेल्ट और रॉन्ग साइड ड्राइविंग के विरुद्ध निरंतर अभियान चलाया जाए।
जागरूकता: युवाओं और वाहन चालकों के लिए नियमित अंतराल पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि उन्हें यातायात नियमों के महत्व का पता चल सके।
सहरसा में सड़क दुर्घटनाओं का बढ़ना एक सामूहिक विफलता है। यदि अब भी संबंधित विभाग नहीं जागे, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी गहरा सकता है। जनता की सुरक्षा किसी भी विकास कार्य से ऊपर होनी चाहिए। प्रशासन को 'सड़क सुरक्षा माह' के दावों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करने की आवश्यकता है, ताकि सड़कों पर खून का बहना रोका जा सके।