साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को मिली बड़ी राहत; भागलपुर साइबर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर वापस कराए 50,000 रुपये, वैशाली के पीड़ित के चेहरे पर लौटी मुस्कान

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: डिजिटल युग में जहां एक ओर ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस की तकनीकी दक्षता और मुस्तैदी से पीड़ितों को न्याय भी मिलने लगा है। ताजा मामला सिल्क सिटी भागलपुर से सामने आया है, जहां भागलपुर साइबर थाना पुलिस ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक साइबर ठगी के पीड़ित के 50,000 रुपये सकुशल वापस दिला दिए हैं। वैशाली जिले के रहने वाले एक व्यक्ति के साथ गत 2 जुलाई को साइबर ठगों ने धोखाधड़ी कर यह रकम उड़ा ली थी। जब पुलिस ने इस मामले की तकनीकी जांच शुरू की, तो यह बात सामने आई कि ठगी गई वह पूरी राशि भागलपुर के एक स्थानीय व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी। साइबर पुलिस की इस सराहनीय पहल से पीड़ित के चेहरे पर एक बार फिर मुस्कान लौट आई है।

क्या था पूरा मामला और कैसे हुई थी ठगी?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वैशाली जिले के एक निवासी के साथ साइबर अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया था:

2 जुलाई की घटना: बीते 2 जुलाई को वैशाली के पीड़ित व्यक्ति के मोबाइल पर एक अज्ञात फ्रॉड कॉल या ऑनलाइन लिंक के माध्यम से झांसा दिया गया। साइबर ठगों ने विभिन्न प्रलोभनों या बैंक खाता अपडेट करने का डर दिखाकर पीड़ित के बैंक खाते से 50,000 रुपये की अवैध निकासी कर ली।

पैसा ट्रांसफर होने का रूट: जब पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ, तो उसने तुरंत इसकी शिकायत साइबर क्राइम पोर्टल और संबंधित स्थानीय पुलिस से की। वैशाली से शुरू हुई इस शिकायत के आधार पर जब साइबर सेल ने पैसों के लेनदेन (Money Trail) की तकनीकी जांच (Technical Investigation) शुरू की, तो डिजिटल साक्ष्यों के जरिए यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि ठगी गई पूरी 50,000 रुपये की रकम भागलपुर जिले के एक संदिग्ध बैंक खाते में ट्रांसफर की गई है।

भागलपुर साइबर पुलिस की तकनीकी टीम की सक्रियता

मामले के भागलपुर से जुड़ने के बाद भागलपुर साइबर थाना की विशेष टीम ने बिना वक्त गंवाए मामले को अपने हाथ में लिया:

खाता होल्ड और त्वरित कार्रवाई: साइबर थानाध्यक्ष और उनकी तकनीकी टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए संबंधित बैंक से संपर्क साधा और जिस खाते में पैसे ट्रांसफर हुए थे, उसकी जानकारी जुटाई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उस खाते को तत्काल प्रभाव से 'होल्ड' करवा दिया ताकि आरोपी उस रकम की निकासी न कर सकें।

कानूनी प्रक्रिया के तहत वापसी: इसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रावधानों और बैंक के साथ समन्वय स्थापित करते हुए वैशाली के पीड़ित व्यक्ति के 50,000 रुपये सुरक्षित रूप से उनके मूल बैंक खाते में वापस ट्रांसफर करवा दिए। रकम वापस मिलने के बाद पीड़ित ने भागलपुर पुलिस की कार्यप्रणाली की भूरी-भूरी प्रशंसा की है।

भागलपुर पुलिस की आम लोगों को चेतावनी और सलाह

इस सफल रिकवरी के बाद भागलपुर साइबर थाना के अधिकारियों ने एक बार फिर आम जनता को जागरूक रहने की अपील की है:

लालच या डर के झांसे में न आएं: पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी फोन पर कभी भी ओटीपी (OTP), पासवर्ड या पिन नंबर नहीं मांगता है।

साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत करें कॉल: यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (Cyber Crime Helpline Number 1930) पर कॉल करना चाहिए या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, ठगी गई रकम के वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

भागलपुर साइबर पुलिस द्वारा वैशाली के पीड़ित को 50,000 रुपये वापस दिलाना इस बात का प्रमाण है कि पुलिस महकमा साइबर अपराधों के खिलाफ कितनी संवेदनशीलता और मुस्तैदी से काम कर रहा है। यह घटना न केवल साइबर अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है, बल्कि आम नागरिकों का कानून और तकनीकी व्यवस्था के प्रति विश्वास भी मजबूत करती है।