पूर्णिया के गढ़बनैली में तीन महीने में ही ध्वस्त हुई पुलिया: कसबा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड 20 में मदारघाट-महंतबाड़ी मार्ग पर बारिश में बहा कलवर्ट, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल; स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

 

बिहार के पूर्णिया जिले के कसबा नगर परिषद क्षेत्र से प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोलती हुई एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। गढ़बनैली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कसबा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 20 स्थित मदारघाट से महंतबाड़ी जाने वाले मार्ग पर नवनिर्मित कलवर्ट (पुलिया) निर्माण के महज तीन महीने के भीतर ही पहली बारिश की मार नहीं झेल सका और क्षतिग्रस्त होकर ढह गया। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इतने कम समय में पुलिया के धराशायी हो जाने से सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली घटिया सामग्री व लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला? तीन महीने पहले ही हुआ था कलवर्ट का निर्माण

प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, कसबा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 20 के अंतर्गत मदारघाट से महंतबाड़ी को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से एक कलवर्ट (पुलिया) का निर्माण कराया गया था। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि इस पुलिया के बन जाने से उनका सफर सुरक्षित और आसान हो जाएगा।

लेकिन यह खुशी बहुत लंबी नहीं टिक सकी। निर्माण के अभी मुश्किल से तीन महीने ही बीते थे कि हाल ही में हुई बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव को यह पुलिया सहन नहीं कर पाई और भरभरा कर क्षतिग्रस्त हो गई। स्थिति यह है कि पुलिया की ईंट से बनी सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वॉल) पूरी तरह से पानी में बह गई है, जबकि जल निकासी के लिए नीचे लगाया गया भारी पाइप भी अपनी जगह से खिसककर पूरी तरह हट चुका है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: घटिया सामग्री और लापरवाही का लगाया आरोप

पुलिया के इस तरह चंद दिनों में ही ध्वस्त हो जाने से स्थानीय लोगों में प्रशासन और संवेदकों (ठेकेदारों) के खिलाफ गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी ईमानदारी और निर्धारित तकनीकी मानकों (Technical Standards) के तहत किया गया होता, तो मामूली बारिश में ही पुलिया इस प्रकार नहीं टूटती।

ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया है कि इस निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और बेहद घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। लोगों का यह भी कहना है कि जिस स्थान पर यह पुलिया बनाई गई थी, वहाँ हर वर्ष बाढ़ और पानी के दबाव के कारण मिट्टी का कटाव होता है। इसके बावजूद बिना किसी ठोस और दूरदर्शी योजना (Solid Planning) के खानापूरी करते हुए निर्माण करा देना सीधे तौर पर सरकारी धन की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है।

आवागमन ठप, बाढ़ के मौसम को लेकर बढ़ी चिंता

पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से मदारघाट से महंतबाड़ी जाने वाले इस मार्ग पर यातायात और पैदल चलना पूरी तरह से बाधित हो गया है। रोजमर्रा के कामकाज के लिए इसी रास्ते से गुजरने वाले स्कूली बच्चों, किसानों और आम नागरिकों को अब भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अभी तो मानसून की शुरुआत ही हुई है और ठीक से बाढ़ का मौसम भी नहीं आया है, तब यह हाल है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में जब बाढ़ का पानी पूरी तरह बढ़ेगा, तब स्थिति और भी अधिक भयावह और गंभीर हो जाएगी।

स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें

घटना के बाद एकजुट हुए ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन के समक्ष कुछ कड़े और स्पष्ट विकल्प रखे हैं:

उच्चस्तरीय तकनीकी जांच: संबंधित विभाग द्वारा पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए।

दोषियों पर कार्रवाई: इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार संवेदक, इंजीनियर और दोषी अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जाए।

शीघ्र पुनर्निर्माण: जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुलिया का तत्काल और मजबूत तरीके से पुनर्निर्माण कराया जाए ताकि आवागमन सुचारू हो सके।

नगर परिषद के अधिकारियों की प्रतिक्रिया और सफाई

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद कसबा नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों के बयान भी सामने आए हैं। निर्माण कार्य से जुड़े नगर परिषद कर्मी रमाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कार्य किसी बड़े टेंडर के बजाय 'वाउचर' के माध्यम से कराया गया था। उन्होंने यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा कि इसी स्थान पर पिछले वर्ष भी निर्माण कार्य कराया गया था और इस बार जो तीन महीने पहले निर्माण हुआ था, उसका वाउचर अभी तक कार्यालय में जमा नहीं किया गया है।

वहीं, कसबा नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी दीपक कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आश्वासन दिया है कि इस कलवर्ट निर्माण की पूरी तकनीकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट में यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो दोषी के खिलाफ सख्त नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। फिलहाल, इस घटना के बाद से पूरे इलाके में प्रशासनिक चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।