बिरयानी खिलाने का झांसा देकर 16 वर्षीय किशोरी के अपहरण मामले में दोषी रोशन कुमार को पांच साल की कैद और 10,000 रुपये का जुर्माना
मुजफ्फरपुर: बालिकाओं की सुरक्षा, गरिमा और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करना किसी भी सभ्य समाज और मजबूत न्याय प्रणाली की सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। जब कोई दरिंदा या अपराधी नाबालिग बच्चों को प्रलोभन देकर उन्हें उनके परिजनों से अलग करने और उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करने की साजिश रचता है, तो कानून का कड़ा प्रहार ही एकमात्र ऐसा माध्यम बचता है जो समाज में न्याय का विश्वास कायम रखता है। बिहार के अति संवेदनशील और कानूनी मामलों में तेजी से फैसले सुनाने वाले मुजफ्फरपुर जिले से बाल अधिकारों की सुरक्षा को रेखांकित करने वाली एक बेहद अहम और न्यायपूर्ण खबर सामने आ रही है। मुजफ्फरपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट (POCSO Court) ने एक सनसनीखेज मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 16 वर्षीय किशोरी के अपहरण के मामले में दोषी करार दिए गए रोशन कुमार को पांच साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
इस बहुचर्चित मामले में अदालत ने न केवल कारावास का दंड तय किया है, बल्कि अपराधी पर 10,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। न्याय की अनूठी मिसाल पेश करते हुए अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि जुर्माने के रूप में वसूली जाने वाली यह पूरी की पूरी राशि बतौर प्रतिकर (Compensation) सीधे तौर पर पीड़ित किशोरी को प्रदान की जाएगी। इस फैसले के बाद से बाल अपराधों के खिलाफ अदालत की संवेदनशीलता और सख्ती का एक बार फिर से प्रमाण मिला है।
घटना का षड्यंत्र: बिरयानी का बहाना और बहला-फुसलाकर अपहरण
यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के एक स्थानीय थाना क्षेत्र का है, जहां एक साधारण और गरीब परिवार की 16 वर्षीय नाबालिग बेटी अपने घर के पास रहती थी। अपराधी किस प्रकार मासूमों को अपने जाल में फंसाने के लिए छोटे-छोटे प्रलोभनों का इस्तेमाल करते हैं, इस घटना ने इसका पर्दाफाश कर दिया है।
खाने का लालच और साजिश: दोषी रोशन कुमार ने उस नाबालिग किशोरी को अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों और विश्वास में लेने के लिए एक घटिया चाल चली। उसने किशोरी को बाहर ले जाकर 'बिरयानी' खिलाने का लालच और बहाना दिया।
भय और भरोसे का दुरुपयोग: एक नाबालिग बच्ची, जो उस समय दुनियादारी की चालाकियों से अनजान थी, अपराधी के इस झांसे में आ गई। रोशन कुमार ने इसी सुनहरे अवसर का फायदा उठाते हुए किशोरी को भरोसे में लिया और उसे बहला-फुसलाकर उसके घर से दूर अगवा कर ले गया।
परिवार में मचा कोहराम: जब तय समय तक किशोरी घर वापस नहीं लौटी, तो परिजनों के होश उड़ गए। उन्होंने आसपास, रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों पर अपनी बेटी की तलाश शुरू कर दी, लेकिन जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इसके बाद पुलिस की शरण ली गई और नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
पुलिस अनुसंधान और विशेष पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई
मामला चूंकि एक 16 वर्षीय नाबालिग बालिका के अपहरण और प्रलोभन से जुड़ा हुआ था, इसलिए पुलिस ने भी इसकी गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर किशोरी को सकुशल बरामद कर लिया तथा मुख्य आरोपी रोशन कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
पॉक्सो अधिनियम के तहत कानूनी शिकंजा: नाबालिग होने के कारण इस मामले की सुनवाई मुजफ्फरपुर की विशेष पॉक्सो अदालत में चली। अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने अदालत में पीड़िता का बयान, मेडिकल जांच के कागजात और पुलिस द्वारा जुटाई गई तमाम कड़ियों को मजबूत साक्ष्यों के रूप में पेश किया।
दोषी करार दिए जाने की प्रक्रिया: अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया कि आरोपी ने नाबालिग को पूर्वनियोजित साजिश के तहत खाने का लालच देकर उसका अपहरण किया था। तमाम गवाहों और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने रोशन कुमार को दोषी करार दिया।
सजा का ऐलान: साक्ष्यों की सत्यता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए विशेष पॉक्सो कोर्ट ने विचारोपरांत रोशन कुमार को पांच साल के कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
न्याय प्रणाली और समाज के लिए संदेश
इस मुकदमे का तार्किक और न्यायसंगत अंजाम तक पहुंचना यह सिद्ध करता है कि कानून और अदालतें बालिकाओं के शोषण के प्रति शून्य सहहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही हैं।
प्रलोभनों के प्रति सतर्कता: यह घटना उन तमाम अभिभावकों और बच्चों के लिए एक बड़ा सबक है जिन्हें बाहरी लोगों द्वारा दिए जाने वाले छोटे-मोटे उपहारों या खाने-पीने के प्रलोभनों से सावधान रहने की जरूरत है।
पीड़िता को आर्थिक संबल: कोर्ट द्वारा लगाया गया 10,000 रुपये का जुर्माना भले ही उस मानसिक आघात की पूरी भरपाई न कर सके, लेकिन यह पीड़ित परिवार को यह अहसास कराता है कि न्याय प्रणाली उनके साथ खड़ी है।
मुजफ्फरपुर विशेष पॉक्सो कोर्ट द्वारा बिरयानी का बहाना बनाकर 16 वर्षीय किशोरी का अपहरण करने वाले रोशन कुमार को पांच साल की सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना दिए जाने का यह निर्णय एक स्वागत योग्य कदम है। यह फैसला इस बात की बानगी है कि अदालतें साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को उनके किए की सजा देने में कोई कोताही नहीं बरतती हैं। यह न्यायपूर्ण आदेश न केवल पीड़ित किशोरी और उसके परिवार को संबल प्रदान करेगा, बल्कि समाज के उन सभी असामाजिक तत्वों के लिए भी एक कठोर चेतावनी साबित होगा जो नाबालिगों के भोलेपन का फायदा उठाकर उन्हें अपने कुप्रपंच का शिकार बनाने की हिमाकत करते हैं।