भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष मामून रशीद ने छात्र आंदोलन को लेकर दिया तीखा बयान; कहा—"छात्रों की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेक रहा है विपक्ष, अराजकता फैलाने वालों पर हो कड़ी कानूनी कार्रवाई"
भागलपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि: बिहार की रेशमी नगरी भागलपुर में इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक मामलों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी बीच, सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से भी इस संवेदनशील मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। भागलपुर में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष मामून रशीद ने हालिया छात्र आंदोलन और उसके बाद शहर में उपजे हालात को लेकर एक विस्तृत बयान जारी किया है। मामून रशीद ने इस दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कुछ राजनीतिक दल और स्वार्थी तत्व अपनी नाकामी को छुपाने तथा अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए मासूम छात्रों के कंधे का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आंदोलन की आड़ में शहर की शांति व्यवस्था को भंग करने और उपद्रव फैलाने वाले असामाजिक तत्वों की कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
छात्रों की वास्तविक चिंताओं और राजनीति पर मामून रशीद का बयान
भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष मामून रशीद ने अपने बयान में सबसे पहले यह स्वीकार किया कि देश और राज्य के युवाओं तथा छात्रों के मन में परीक्षाओं को लेकर कुछ वैध चिंताएं और समस्याएं हो सकती हैं। सरकार और संबंधित महकमे उन समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह से संवेदनशील और गंभीर हैं।
छात्रों के भविष्य के प्रति संवेदनशीलता: मामून रशीद ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार की एनडीए सरकार हमेशा से युवाओं और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध रही है। शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार लगातार कड़े कदम उठा रही है।
विपक्ष पर बड़ा हमला: उन्होंने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब सरकार समस्याओं के समाधान के रास्ते पर चल रही है, तब कुछ विपक्षी दल और राजनीतिक संगठन युवाओं के भविष्य की चिंता करने के बजाय केवल और केवल अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटे हैं। ये लोग भोले-भाले छात्रों को आगे कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।
आंदोलन की आड़ में हिंसा और अराजकता बर्दाश्त नहीं
हाल ही में बिहार बंद और छात्र आंदोलनों के दौरान सड़कों पर हुई तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस बल पर हुए हमलों की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा नेता मामून रशीद ने दो टूक शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक देश में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि कोई कानून को अपने हाथ में ले ले।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान: उन्होंने कहा कि आंदोलन के नाम पर सरकारी और गैर-सरकारी संपत्तियों को तहस-नहस करना, आम नागरिकों की गाड़ियों में तोड़फोड़ करना तथा यातायात को बाधित करना किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन: मामून रशीद ने पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा उपद्रवियों पर की जा रही कार्रवाई का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर उन सभी लोगों की पहचान की जानी चाहिए जिन्होंने शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को हिंसा और उपद्रव में बदलने का कुत्सित प्रयास किया है।
आम जनजीवन और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील
भागलपुर के प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं से अपील करते हुए भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष ने कहा कि रेशमी नगरी भागलपुर अपनी गंगा-जमुनी तहजीब, शांति और भाईचारे के लिए जानी जाती है। यहाँ के विकास और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली किसी भी साजिश का हिस्सा किसी को नहीं बनना चाहिए।
अफवाहों से बचने की सलाह: उन्होंने युवाओं से विशेष आग्रह किया कि वे सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक और मनगढ़ंत अफवाहों के झांसे में न आएं। असामाजिक तत्व अक्सर ऐसी परिस्थितियों का फायदा उठाकर शहर का माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं, जिनसे सतर्क रहने की आवश्यकता है।
संवाद से समाधान की पहल: मामून रशीद ने अंत में कहा कि सरकार और प्रशासन हमेशा संवाद के द्वार खुले रखने के पक्ष में हैं। छात्रों की किसी भी जायज मांग पर सकारात्मक तरीके से विचार किया जा रहा है, इसलिए युवाओं को धैर्य का परिचय देना चाहिए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करना चाहिए।
भागलपुर में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष मामून रशीद द्वारा छात्र आंदोलन और उस दौरान हुई हिंसा पर दिया गया यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से इस तरह के बयानों के जरिए यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह सजग है, लेकिन अराजकता और उपद्रव को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।