बिहार के मंत्री अशोक चौधरी को एक्स और जीमेल अकाउंट के नाम पर फिरौती की धमकी, साइबर थाने में नया आवेदन; पूर्व निजी सहायक पर गंभीर आरोप
पटना। बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री डॉ. अशोक चौधरी से जुड़े एक कथित साइबर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मंत्री के आधिकारिक एक्स (X) हैंडल और जीमेल (Gmail) अकाउंट के एक्सेस को लेकर पटना साइबर थाने में नया आवेदन दिया गया है। मंत्री के आप्त सचिव रक्षित कश्यप ने पुलिस को सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया है कि मंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया और ईमेल अकाउंट का नियंत्रण वापस देने के बदले फिरौती मांगी जा रही है। आवेदन में जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।
यह मामला पहले से दर्ज एफआईआर से जुड़ा हुआ है। नए आवेदन के माध्यम से पुलिस से मामले में त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में मंत्री के पूर्व निजी सहायक को मुख्य आरोपित बताया गया है।
साइबर थाने में दिया गया नया आवेदन
मंत्री के आप्त सचिव रक्षित कश्यप ने पटना साइबर थाना पहुंचकर विस्तृत आवेदन सौंपा। आवेदन में कहा गया है कि मंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल और जीमेल अकाउंट का नियंत्रण अब भी पूर्व निजी सहायक के पास है। आरोप है कि कई बार अकाउंट का एक्सेस वापस करने का अनुरोध किए जाने के बावजूद उसे वापस नहीं सौंपा गया।
शिकायत के अनुसार, अकाउंट की पहुंच लौटाने के बदले कथित रूप से फिरौती की मांग की गई। साथ ही गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी भी दी गई। इन आरोपों के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
पहले से दर्ज है एफआईआर
जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में पहले ही एक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। अब नए आवेदन में अतिरिक्त तथ्यों और नए आरोपों का उल्लेख करते हुए पुलिस से विस्तृत जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नए साक्ष्यों और घटनाक्रम को भी जांच का हिस्सा बनाया जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
पूर्व निजी सहायक पर गंभीर आरोप
आवेदन में मंत्री के पूर्व निजी सहायक पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, मंत्री के कार्यकाल के दौरान आधिकारिक एक्स हैंडल और जीमेल अकाउंट का संचालन वही करता था। इसी कारण उसके पास इन खातों का तकनीकी नियंत्रण और एक्सेस मौजूद था।
आरोप है कि पद से हटने के बाद भी उसने इन खातों का नियंत्रण वापस नहीं किया और अब कथित रूप से उसी का लाभ उठाकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के आधिकारिक डिजिटल अकाउंट की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आज के समय में सोशल मीडिया और ईमेल अकाउंट केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि सरकारी सूचनाओं, आधिकारिक घोषणाओं और जनसंपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अकाउंट एक्सेस, पासवर्ड प्रबंधन, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और प्रशासनिक नियंत्रण की स्पष्ट व्यवस्था होना आवश्यक है।
पुलिस कर रही जांच
पटना साइबर थाना पुलिस ने आवेदन प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है, जिसमें अकाउंट लॉग-इन रिकॉर्ड, एक्सेस हिस्ट्री, ईमेल गतिविधियां और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण शामिल हो सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की जांच उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
साइबर अपराध के बढ़ते मामले
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, ईमेल नियंत्रण, डिजिटल ब्लैकमेल और ऑनलाइन फिरौती जैसे साइबर अपराधों में वृद्धि हुई है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत ही नहीं बल्कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के अकाउंट भी निशाना बनाए जा रहे हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सभी महत्वपूर्ण खातों में नियमित पासवर्ड परिवर्तन, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और अधिकृत व्यक्तियों की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए।
राजनीतिक हलकों में चर्चा
मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। चूंकि मामला एक राज्य सरकार के मंत्री के आधिकारिक डिजिटल खातों से जुड़ा है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
डिजिटल सुरक्षा की आवश्यकता
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विभागों और जनप्रतिनिधियों के आधिकारिक सोशल मीडिया एवं ईमेल अकाउंट के संचालन के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल होना चाहिए। किसी अधिकारी या कर्मचारी के कार्यमुक्त होने पर सभी डिजिटल एक्सेस तुरंत वापस लिए जाने चाहिए और सुरक्षा व्यवस्थाओं को अपडेट किया जाना चाहिए।
इस तरह की सावधानियां भविष्य में ऐसे विवादों और संभावित साइबर अपराधों को रोकने में मदद कर सकती हैं।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री डॉ. अशोक चौधरी के आधिकारिक एक्स हैंडल और जीमेल अकाउंट को लेकर सामने आया यह मामला बिहार में साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। आप्त सचिव द्वारा पटना साइबर थाने में दिए गए नए आवेदन में फिरौती मांगने और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि शिकायत में मंत्री के पूर्व निजी सहायक को आरोपित किया गया है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने सही हैं और इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही। तब तक यह मामला बिहार के सबसे चर्चित साइबर मामलों में से एक बना हुआ है।