भोजपुर का भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: महिलाओं के 'मसीहा' की मौत पर बवाल, न्यायिक जांच के आदेश

 बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) में हुई मौत के बाद पूरे इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। जहां एक तरफ स्थानीय लोग और विस्थापित महिलाएं भरत तिवारी को अपना 'भगवान और रक्षक' बता रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस की थ्योरी पर लगातार बड़े सवाल उठ रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं।

 मुख्य बिंदु और घटनाक्रम

मृतक का नाम: भरत भूषण तिवारी (उम्र 28 वर्ष), निवासी- बिलौटी, शाहपुर (भोजपुर)।

विवाद की वजह: पुलिस ने इसे आत्मरक्षा में की गई फायरिंग बताया, जबकि ग्रामीणों और परिजनों ने इसे 'फर्जी एनकाउंटर' और हत्या करार दिया है।

सरकारी एक्शन: शाहपुर थाना प्रभारी (SHO) और सब-इंस्पेक्टर समेत 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड; मामले की न्यायिक जांच शुरू।

 'गरीबों का मसीहा' या बागी? क्यों भगवान मानती थीं महिलाएं?

स्थानीय स्तर पर मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक, भरत तिवारी कोई पेशेवर अपराधी नहीं था। वह जवनिया गांव के गंगा कटाव पीड़ितों (विस्थापितों) के हक की लड़ाई लड़ रहा था।

जमीन का विवाद: सरकार द्वारा विस्थापितों को बिलौटी गांव के पास एक गड्ढे वाली जमीन दी जा रही थी। भरत की मांग थी कि पहले प्रशासन वहां मिट्टी भरवाए ताकि गरीब अपने घर बना सकें।

सुरक्षा के लिए बेचे थे गहने: स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों के अनुसार, व्यवस्था से लड़ते-लड़ते भरत को अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा था। उसने अपनी सुरक्षा के लिए अपना सोने का लॉकेट/चेन बेचकर एक पिस्टल खरीदी थी। वह खुद को शहीद भगत सिंह की विचारधारा से प्रेरित बताता था।

 फेसबुक लाइव वीडियो ने खोली पुलिस के दावों की पोल!

इस पूरे एनकाउंटर पर सबसे बड़ा सवाल उस फेसबुक लाइव वीडियो से खड़ा हुआ है, जो घटना के वक्त खुद भरत तिवारी ने बनाया था।

सरेंडर की कोशिश: वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि भरत पुलिस के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) करने के लिए तैयार था और उसने अपनी पिस्टल भी जमीन पर फेंक दी थी।

पुलिस की दलील: पुलिस का कहना है कि भरत ने सरेंडर का नाटक किया और जैसे ही पुलिस हथियार उठाने बढ़ी, उसने दोबारा पिस्टल उठाकर फायरिंग की कोशिश की, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने उसके पैर में गोलियां मारीं। बाद में पटना के PMCH अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

 परिजनों की मांग: "न्यायिक जांच मंजूर नहीं, मर्डर केस दर्ज हो"

मुख्यमंत्री द्वारा न्यायिक जांच के आदेश और पुलिसकर्मियों के निलंबन के बावजूद पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है। भरत तिवारी के परिजनों और ग्रामीणों ने आरा-बक्सर फोरलेन को जाम कर प्रदर्शन किया। परिवार का कहना है कि वे इस सरकारी जांच को स्वीकार नहीं करते और वे दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीधे हत्या (Murder) का मुकदमा दर्ज कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।