बरारी श्मशान घाट मार्ग बना 'नरक', अपनों की अंतिम विदाई देने आ रहे मृत के परिजनों को कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरने की विवशता; प्रशासनिक उदासीनता पर टिकी लोगों की नजरें

भागलपुर, मुख्य संवाददाता: किसी अपने को खोने का गम दुनिया का सबसे बड़ा दर्द होता है, लेकिन जब उसी प्रियजन की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए परिजनों को घुटने भर कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़े, तो यह दर्द और अधिक टीस पैदा कर देता है। बिहार के भागलपुर जिले से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आ रही है, जहां शहर के प्रमुख बरारी श्मशान घाट मार्ग (विशेषकर बियाडा मोड़ के पास) पर पसरी नरकीय स्थिति ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जीवन के अंतिम सफर पर निकले शव को कांधा देने वाले परिजनों के लिए यह मार्ग किसी सजा से कम नहीं साबित हो रहा है।

बियाडा मोड़ के पास सड़क की स्थिति अत्यंत दयनीय, बना दलदल

भागलपुर के बरारी श्मशान घाट की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर जलजमाव और कीचड़ की समस्या अब नासूर बनती जा रही है। स्थिति यह है कि बियाडा मोड़ के पास सड़क के बीचोंबीच एक बड़े हिस्से में लंबे समय से गंदा पानी जमा रहता है।

जलनिकासी का अभाव: स्थानीय स्तर पर जलनिकासी (Drainage System) की पुख्ता व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी या आसपास का गंदा पानी इसी सड़क पर आकर ठहर जाता है।

दलदल में तब्दील रास्ता: जब पानी कुछ सूखता है, तो वह सड़क के चारों तरफ एक चिपचिपे और गहरे दलदल जैसे कीचड़ में तब्दील हो जाता है। इस कीचड़ भरे रास्ते से दोपहिया वाहन, चारपहिया वाहन और शव वाहन (एम्बुलेंस) तक का गुजरना बेहद जोखिम भरा हो गया है। वाहन चालक किसी तरह संतुलन बनाते हुए इस नर्क जैसे रास्ते को पार करने को मजबूर हैं।

अंतिम यात्रा में शामिल होने आए परिजनों का झलकता है दर्द

अंतिम संस्कार जैसे पवित्र और संवेदनशील कार्य के लिए जब लोग अपने स्वजनों के पार्थिव शरीर को लेकर इस रास्ते से गुजरते हैं, तो उनकी आंखें अपनों के बिछड़ने के गम के साथ-साथ इस व्यवस्था को कोसते हुए नम हो जाती हैं।

शव यात्रा में शामिल होने वाले स्थानीय नागरिकों और शोक संतप्त परिजनों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि एक तरफ वे अपनों के दुनिया से जाने के गहरे सदमे में होते हैं, वहीं दूसरी तरफ श्मशान घाट तक पहुंचने वाला यह खस्ताहाल और कीचड़युक्त रास्ता उनके मानसिक संताप को कई गुना बढ़ा देता है। सफेद वस्त्रों में अंतिम यात्रा में चल रहे लोगों के कपड़े कीचड़ के छींटों से सन जाते हैं। कई बार तो बुजुर्ग और महिलाएं संतुलन बिगड़ जाने के कारण इसी गंदे पानी और कीचड़ में गिरकर चोटिल भी हो जाती हैं।

अव्यवस्थाओं का केंद्र बनता जा रहा बरारी श्मशान घाट मार्ग

यह केवल एक दिन या हल्की बारिश की समस्या नहीं है, बल्कि बरारी श्मशान घाट मार्ग की बदहाली लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई है। शहर के तमाम हिस्सों से लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए इसी घाट पर पहुंचते हैं, लेकिन यहाँ की बुनियादी सुविधाएं प्रशासन की संवेदनहीनता की कहानी बयां करती हैं।

वाहन चालकों की मनमानी: सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और कीचड़ के कारण ऑटो या अन्य वाहन चालक इस रूट पर आने से कतराते हैं। यदि कोई आता भी है, तो वह शोक संतप्त परिजनों से मनमाना किराया वसूलता है।

पैदल चलना भी हुआ मुहाल: जो लोग परंपरा के अनुसार अपने प्रियजन की अर्थी के साथ पैदल श्मशान घाट तक आते हैं, उन्हें इस कीचड़ भरे रास्ते पर नंगे पांव चलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

प्रशासनिक आश्वासन और समाधान की आस

इस मार्ग पर व्याप्त नरकीय स्थिति और मीडिया में खबरें आने के बाद अब स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की नींद थोड़ी खुली है। प्रशासनिक गलियारों से मिल रही जानकारी के अनुसार, नगर निगम द्वारा इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सुगबुगाहट तेज कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि श्मशान घाट मार्ग पर जलजमाव की समस्या से निजात दिलाने के लिए नाला निर्माण और सड़क के पक्कीकरण की योजनाओं पर विचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में लोगों को इस प्रकार की अमानवीय परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

किसी भी सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने जीवित नागरिकों के साथ-साथ अपने मृतकों को कितनी सम्मानजनक विदाई देता है। भागलपुर के बरारी श्मशान घाट मार्ग पर पसरा कीचड़ और गंदा पानी सिर्फ एक सड़क की खराब स्थिति को नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है। जरूरत इस बात की है कि खोखले आश्वासनों से ऊपर उठकर धरातल पर त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि अंतिम यात्रा पर निकलने वाले हर शख्स को कम से कम सम्मानजनक मार्ग मिल सके।