बनमनखी के प्रसिद्ध धीमेश्वर धाम में सावन की पहली सोमवारी पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब: एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए बाबा उग्रेश्वर नाथ के दर्शन और जलाभिषेक
बिहार के पूर्णिया जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल बनमनखी स्थित प्रसिद्ध धीमेश्वर धाम में सावन मास की पहली सोमवारी के अवसर पर आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। विभिन्न जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे लगभग एक लाख श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर भगवान शिव के स्वरूप बाबा उग्रेश्वर नाथ (धीमेश्वर नाथ) का जलाभिषेक किया। हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस-प्रशासन द्वारा सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे।
मंदिर की पौराणिक महत्ता और आस्था का केंद्र (Historical Importance and Significance)
धीमेश्वर धाम केवल पूर्णिया जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे सीमांचल क्षेत्र में अगाध आस्था का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
पौराणिक मान्यता: ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान शिव के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन के महीने में इस मंदिर का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
दूर-दूर से पहुंचे भक्त: सावन की पहली सोमवारी को लेकर रविवार की देर रात से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। सोमवार की सुबह होते-होते मंदिर परिसर और उसके आसपास मीलों लंबी कतारें देखने को मिलीं।
भक्तों की भारी भीड़ और जलाभिषेक का क्रम (Massive Crowd and Jalabhishek Tradition)
सावन की पहली सोमवारी के मौके पर सुबह से ही भक्तों में भारी उत्साह देखा गया।
कांवरियों की लंबी कतारें: भगवा वस्त्र धारण किए हुए कांवड़िए और स्थानीय श्रद्धालु बोल बम के जयकारे लगाते हुए मंदिर में प्रवेश कर रहे थे।
दूध और गंगाजल से अभिषेक: श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर विधि-विधान के साथ बाबा उग्रेश्वर नाथ को बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध और गंगाजल अर्पित किया तथा अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था (Administrative and Security Arrangements)
भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने पुख्ता इंतजाम किए थे:
पुलिस बल की तैनाती: मंदिर परिसर से लेकर मुख्य मार्ग तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई थी।
स्वयंसेवकों की भूमिका: स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने भी पानी वितरण और कतार को व्यवस्थित रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सीसीटीवी निगरानी: असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे और ड्रोन के जरिए भी निगरानी रखी जा रही थी।
मेला और उत्सव जैसा माहौल (Fair and Festive Atmosphere)
धीमेश्वर धाम में सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर एक भव्य मेले जैसा माहौल देखने को मिला।
दुकानों की सजावट: मंदिर के आसपास पूजा-पाठ की सामग्री, फल-फूल, मिठाई और बच्चों के खिलौनों की दुकानें सजी हुई थीं।
व्यापारियों में उत्साह: दुकानदारों का कहना था कि सावन के पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण उनकी अच्छी खासी बिक्री हुई है, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ भी मिला है।
बनमनखी के धीमेश्वर धाम में सावन की पहली सोमवारी पर उमड़ी एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ यह साबित करती है कि भारतीय संस्कृति में सनातन धर्म और धार्मिक आयोजनों के प्रति लोगों की निष्ठा कितनी गहरी है। शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुए इस जलाभिषेक ने एक बार फिर इस पावन स्थल की महत्ता को और बढ़ा दिया है। आने वाले सोमवारों पर भी प्रशासन द्वारा इसी प्रकार की चाक-चौबंद व्यवस्था बनाए रखने की उम्मीद है।