विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में प्रशासनिक तैयारियों का दिखा असर; सुल्तानगंज के नमामि गंगे घाट पर उमड़ी शिवभक्तों की भारी भीड़, कांवरियों को मिल रही हैं उच्चस्तरीय सुविधाएं
भागलपुर/सुल्तानगंज, कार्यालय संवाददाता: देवभूमि कहे जाने वाले भागलपुर जिले के सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट पर विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले का माहौल अपने चरम पर है। देश के कोने-कोने से आ रहे लाखों शिवभक्तों की भीड़ से पूरा मेला क्षेत्र केसरिया रंग में रंग चुका है। इस वर्ष मेले के दौरान प्रशासन द्वारा की गई चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के परिणामस्वरूप घाटों पर कांवरियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। विशेष तौर पर नमामि गंगे घाट पर कांवरियों की सबसे अधिक भीड़ देखने को मिल रही है, जहां स्नान करने, जल भरने और संकल्प कराने के लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच शिवभक्त पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रहे हैं और 'बोल बम' के जयकारों के साथ बाबाधाम की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।
नमामि गंगे घाट पर उमड़ रहा आस्था का सैलाब
सुल्तानगंज का नमामि गंगे घाट अपनी आधुनिक संरचना और स्वच्छता के कारण देश भर से आने वाले कांवरियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है:
भारी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु: जैसे-जैसे सावन का महीना आगे बढ़ रहा है, नमामि गंगे घाट पर जल भरने वाले शिवभक्तों का तांता लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि अन्य घाटों की तुलना में नमामि गंगे घाट पर सबसे अधिक कांवरिया अपनी यात्रा की शुरुआत करने पहुंच रहे हैं।
सुरक्षित और सुगम जलार्पण व्यवस्था: घाट पर सीढ़ियों से लेकर गंगा के जल स्तर तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बैरिकेडिंग इतनी मजबूत और व्यवस्थित है कि भारी भीड़ होने के बावजूद भी किसी प्रकार की भगदड़ या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हो रही है। गहरे पानी में कांवरियों की सुरक्षा के लिए एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और गोताखोरों की तैनाती 24 घंटे की गई है।
कांवरियों की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा किए गए विशेष इंतजाम
बिहार सरकार, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग इस बार श्रावणी मेले को लेकर पूरी तरह मुस्तैद हैं, जिसका जमीनी असर घाटों पर साफ दिखाई दे रहा है:
आधुनिक लॉकर सुविधा: नमामि गंगे घाट और मुख्य सीढ़ी घाट के पास कांवरियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से आधुनिक लॉकर की व्यवस्था की गई है। यहाँ कांवरिया अपने महंगे सामान, कपड़े और मोबाइल सुरक्षित रखकर निश्चिंत होकर गंगा में स्नान कर रहे हैं और जल भर रहे हैं।
पेयजल और प्रकाश व्यवस्था: घाटों पर शुद्ध पेयजल के लिए कई वाटर एटीएम और टैंकर लगाए गए हैं। इसके साथ ही, रात के समय भी कांवरियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए उच्च क्षमता वाली एलईडी लाइटों और फ्लडलाइट्स से पूरा नमामि गंगे घाट जगमगा रहा है।
स्वच्छता अभियान: नमामि गंगे घाट से लेकर पूरे कांवरिया पथ तक साफ-सफाई के लिए विशेष स्वच्छता कर्मियों की टीम को तीन पालियों में लगाया गया है, जो लगातार कचरा उठाकर घाट को पूरी तरह स्वच्छ बनाए रख रही है।
स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सा शिविर
लंबी पदयात्रा पर निकलने से पहले किसी भी कांवरिया को स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तुरंत मदद पहुँचाने के लिए पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं:
24 घंटे सक्रिय मेडिकल कैंप: नमामि गंगे घाट के पास ही अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किया गया है, जहां डॉक्टर और पारा मेडिकल स्टाफ मुस्तैद हैं।
दवाइयों और एम्बुलेंस की उपलब्धता: शिविर में थकान, दर्द, छाले और ओआरएस के पैकेट के साथ-साथ आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। आपातकालीन स्थिति के लिए उन्नत जीवन रक्षक प्रणालियों से लैस एम्बुलेंस भी हर समय तैनात रखी गई है।
शिवभक्तों की प्रतिक्रिया: "प्रशासनिक व्यवस्थाओं से यात्रा हुई आसान"
देश के विभिन्न राज्यों जैसे झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से आए कांवरियों ने नमामि गंगे घाट की व्यवस्थाओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है:
श्रद्धालुओं के अनुभव: पश्चिम बंगाल से आए कांवरिया समूह ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार सुल्तानगंज में प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाएं बेहद शानदार हैं। नमामि गंगे घाट पर न केवल साफ-सफाई उत्तम है, बल्कि पुलिस बल का सहयोगपूर्ण रवैया भी सराहनीय है।
सुरक्षा का अहसास: महिला कांवरियों ने भी विशेष रूप से महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती और चेंजिंग रूम्स (कपड़े बदलने की व्यवस्था) की उपलब्धता पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस बार उन्हें किसी भी स्तर पर असुरक्षा या असुविधा का अहसास नहीं हुआ है।
सुल्तानगंज के नमामि गंगे घाट पर उमड़ी कांवरियों की भारी भीड़ और वहां प्रशासनिक मुस्तैदी से सुचारू रूप से संचालित हो रही व्यवस्थाएं यह साबित करती हैं कि सरकार और स्थानीय प्रशासन तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। बिना किसी असुविधा के कांवरियों का हंसते-मुस्कुराते और 'बोल बम' के जयकारे लगाते हुए बाबाधाम की ओर बढ़ना इस बात का प्रतीक है कि श्रावणी मेला 2026 अपनी भव्यता और सुव्यवस्था के नए आयाम गढ़ रहा है।