अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख; श्रावणी मेला में श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए जगदीशपुर बाजार और बलुआचक चौक पर सीओ का अल्टीमेटम, चेतावनी के बाद भी दुकानदारों ने नहीं हटाया सामान
भागलपुर/जगदीशपुर, कार्यालय संवाददाता: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों शिवभक्तों की यात्रा को सुगम, सुरक्षित और बाधा रहित बनाने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद हो चुका है। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के संवेदनशील और व्यस्त इलाकों में शुमार जगदीशपुर बाजार तथा बलुआचक चौक पर फैली अतिक्रमण की समस्या पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। गत गुरुवार को अंचल अधिकारी (CO) ने इन दोनों प्रमुख व्यावसायिक स्थलों का निरीक्षण करते हुए सड़कों पर अवैध कब्जा जमाए बैठे दुकानदारों और अतिक्रमणकारियों को सख्त निर्देश दिया था कि वे खुद-बखुद अपने सामान और ठेले हटा लें। दुकानदारों को हिदायत के तौर पर एक दिन का समय भी दिया गया था, ताकि वे स्वेच्छा से अतिक्रमण हटा लें, लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद ज्यादातर दुकानदारों ने प्रशासन के आदेश को नजरअंदाज कर दिया और सड़कों पर यथावत अतिक्रमण जारी रखा।
क्यों पड़ी अतिक्रमण हटाने की जरूरत? श्रावणी मेला और कांवरियों की राह
श्रावणी मेले के इस पावन अवसर पर जगदीशपुर बाजार और बलुआचक चौक का यह मार्ग कांवरियों और आम राहगीरों के आवागमन का एक मुख्य रास्ता है:
कांवरियों की भारी भीड़: सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर जाने वाले कांवरियों का रेला इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसके अलावा सावन के महीने में स्थानीय श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की संख्या में भारी वृद्धि हो जाती है।
लंबी ट्रैफिक जाम की समस्या: सामान्य दिनों में भी इन बाजारों में सड़क किनारे अवैध रूप से लगाई जाने वाली दुकानें, आगे निकाले गए छप्पर और खड़े किए जाने वाले वाहनों के कारण भयंकर ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। श्रावणी मेले के दौरान यदि यह अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा होने या यातायात पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडरा रहा है। इसी खतरे को भांपते हुए अंचल प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया था।
गुरुवार को सीओ का निरीक्षण और सख्त निर्देश
गुरुवार को अंचल अधिकारी ने पुलिस बल के साथ जगदीशपुर बाजार और बलुआचक चौक का दौरा किया था:
मौके पर दी गई चेतावनी: सीओ ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे सामान सजाकर मुख्य सड़क का एक बड़ा हिस्सा घेर लिया है, जिससे पैदल चलने वालों के लिए भी जगह नहीं बची है।
एक दिन की मोहलत: दुकानदारों और व्यवसायियों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रशासन की ओर से एक दिन की मोहलत दी गई थी। उनसे स्पष्ट रूप से कहा गया था कि वे शुक्रवार तक खुद ही अपने अस्थाई अतिक्रमण, काउंटर और सामान को हटा लें, अन्यथा प्रशासन को बलपूर्वक बुलडोजर और कानूनी कार्रवाई करनी पड़ेगी।
अल्टीमेटम बेअसर: चेतावनी के बाद भी नहीं हटा सामान
प्रशासन की ओर से दी गई चेतावनी का दुकानदारों पर कोई खास असर होता हुआ नहीं दिखा:
लापरवाही और टालमटोल: शुक्रवार और शनिवार को जब स्थिति का जायजा लिया गया, तो यह पाया गया कि इक्का-दुक्का दुकानदारों को छोड़कर अधिकांश व्यापारियों ने अपने सामान नहीं हटाए हैं। वे जस के तस अपनी दुकानों के बाहर सामान सजाए बैठे रहे।
आम जनता और कांवरियों की दुश्वारियां: दुकानदारों के इस रवैये के कारण सड़कों की चौड़ाई सिमटी हुई है, जिससे गाड़ियां तो दूर, पैदल चलने वाले कांवरियों को भी निकलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन के इस सुस्त रवैये पर भी सवाल उठाए हैं कि जब अल्टीमेटम की समय-सीमा खत्म हो चुकी है, तो प्रशासन तुरंत बुलडोजर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है।
प्रशासन का अगला कदम: अब होगी बुलडोजर कार्रवाई और जुर्माना
स्थानीय प्रशासन से मिली अंदरूनी जानकारी के अनुसार, दुकानदारों द्वारा चेतावनी की अनदेखी किए जाने के बाद अब प्रशासन और अधिक सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है:
बुलडोजर और जब्ती अभियान: प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अब किसी भी प्रकार की लीपापोती या मोहलत नहीं दी जाएगी। जल्द ही जगदीशपुर बाजार और बलुआचक चौक पर भारी पुलिस बल और दंडाधिकारी की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा।
सामान जब्ती और जुर्माना: इस दौरान सड़कों पर सामान रखने वाले दुकानदारों के सामान जब्त किए जा सकते हैं और उन पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है, ताकि भविष्य में कोई भी दोबारा सड़क पर अतिक्रमण करने की हिम्मत न जुटा सके।
जगदीशपुर बाजार और बलुआचक चौक पर अतिक्रमण हटाने को लेकर सीओ द्वारा दिए गए निर्देश और दुकानदारों द्वारा उसकी अनदेखी करना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक सख्ती के बावजूद जमीनी स्तर पर अनुशासन का पालन कराना कितना चुनौतीपूर्ण है। श्रावणी मेले की पवित्रता और कांवरियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, ऐसे में प्रशासन को बिना किसी विलंब के तुरंत कड़े कदम उठाते हुए इस अवैध कब्जे को नेस्तनाबूद करना चाहिए, ताकि देवघर जाने वाले शिवभक्तों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।