विकास की राह में 'गड्ढों का जाल': अललपट्टी-रघेपुरा मुख्य मार्ग बदहाली का शिकार, ग्रामीणों का जीना दूभर
दरभंगा: किसी भी क्षेत्र की प्रगति का मुख्य आधार वहां की बेहतर सड़क व्यवस्था होती है, लेकिन दरभंगा जिले के अललपट्टी गुमती से रघेपुरा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इस दावे को झुठला रही है। यह सड़क आज विकास की नहीं, बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली की कहानी बयां कर रही है। वर्षों से मरम्मत के अभाव में यह मार्ग अब पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुका है, जिससे हज़ारों लोगों का दैनिक जीवन नारकीय हो गया है।
जर्जर सड़क: एक अंतहीन संकट
इस सड़क की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ सड़क कम और गड्ढे अधिक दिखाई देते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बरसों पहले बनी इस सड़क पर लंबे समय से न तो कोई पैचवर्क हुआ है और न ही इसका पुनर्निर्माण किया गया। सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है, जिसके कारण वाहनों का चलना तो दूर, पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है।
बारिश और जलजमाव ने बढ़ाई मुसीबत
मानसून की शुरुआत के साथ ही इस सड़क की स्थिति और भी विकराल हो गई है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे बारिश के पानी से भर गए हैं, जिससे यह पता लगाना नामुमकिन हो जाता है कि गड्ढा कितना गहरा है।
बच्चों की सुरक्षा: इस मार्ग का उपयोग करने वाले स्कूली बच्चों के लिए यह स्थिति सबसे खतरनाक है। कीचड़ और पानी से भरी सड़क पर साइकिल और रिक्शा अक्सर अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं। कई अभिभावकों ने सुरक्षा कारणों से बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है या उन्हें लंबी दूरी तय करके दूसरे रास्तों से भेजना पड़ता है।
आवागमन का संकट: स्थानीय लोग, जो कामगार हैं, उन्हें हर दिन ऑफिस या बाजार जाने के लिए इस "मौत के गड्ढों" से होकर गुजरना पड़ता है। दुपहिया वाहनों का संतुलन बिगड़ना यहाँ रोजमर्रा की बात हो गई है।
ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासनिक चुप्पी
स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस सड़क मार्ग से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं, जिनमें वृद्ध, बीमार और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए भी यह रास्ता एक बाधा बना हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा, लेकिन आश्वासन के सिवाय उन्हें कुछ नहीं मिला। हर बार केवल 'जल्द सुधार' का वादा किया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग?
बैठक में एकत्र हुए स्थानीय निवासियों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा:
"हम टैक्स देते हैं, वोट देते हैं, लेकिन बदले में हमें कीचड़ और गड्ढे मिलते हैं। क्या हमारा अधिकार एक सुरक्षित सड़क नहीं है? बारिश में यह रास्ता तालाब जैसा हो जाता है। अगर कोई अनहोनी हो जाए, तो क्या इसका जिम्मेदार प्रशासन होगा?"
एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि सड़क की धूल और कीचड़ के कारण उनके व्यापार पर भी बुरा असर पड़ रहा है। ग्राहकों का आना कम हो गया है क्योंकि सड़क पर चलना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है।
सुध लेने वाला कोई नहीं?
दरभंगा जैसे उभरते हुए शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र में ऐसी सड़कों का होना प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। यह सड़क केवल दो स्थानों को नहीं जोड़ती, बल्कि यह एक क्षेत्र की कनेक्टिविटी का मुख्य स्तंभ है। यदि इसे जल्द दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यहाँ बड़ी दुर्घटनाएं होने की प्रबल संभावना है।
आगे की राह: आंदोलन की चेतावनी
सड़क की इस बदहाली से तंग आकर अब स्थानीय निवासियों ने सड़कों पर उतरने का मन बना लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन करेंगे और सड़क जाम करेंगे।
अललपट्टी गुमती से रघेपुरा जाने वाली यह मुख्य सड़क केवल पत्थर और अलकतरा का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह उन हजारों लोगों की आशा है जो सरकार से केवल मूलभूत सुविधाओं की अपेक्षा रखते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह राजनीति से ऊपर उठकर इस सड़क के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दे। मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति करने से काम नहीं चलेगा; जरूरत है एक ठोस और टिकाऊ सड़क निर्माण की, ताकि लोग सुरक्षित महसूस कर सकें।