पूर्णिया की सड़कों पर मौत का तांडव, 6 महीने में 100 से अधिक लोगों ने गंवाई जान
पूर्णिया: सड़क सुरक्षा के दावों और यातायात नियमों के बावजूद पूर्णिया जिले की सड़कों पर हर दिन खून बह रहा है। 'हिन्दुस्तान' की विशेष पड़ताल में सामने आया है कि इस साल के शुरुआती छह महीनों में जिले के नेशनल हाईवे (NH) और स्टेट हाईवे (SH) पर हुए सड़क हादसों में 100 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है, बल्कि जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
पड़ताल के मुख्य निष्कर्ष: आंकड़ों में मौत का ग्राफ
पूर्णिया जिले से होकर गुजरने वाले एनएच-31, एनएच-57 और स्टेट हाईवे तस्करों और आम यात्रियों के साथ-साथ 'मौत का मार्ग' भी बन गए हैं।
कुल मौतें: जनवरी से जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, सड़क हादसों में मृतकों की संख्या 100 का आंकड़ा पार कर गई है।
घायलों की स्थिति: इन छह महीनों में लगभग 250 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से कई अभी भी दिव्यांगता की स्थिति में हैं।
सबसे खतरनाक मार्ग: सबसे अधिक हादसे एनएच-57 (मजरा-पूर्णिया-दालखोला रूट) और एनएच-31 के व्यस्त चौराहों पर दर्ज किए गए हैं।
सड़क हादसों के प्रमुख कारण: कहाँ चूक रही है व्यवस्था?
'हिन्दुस्तान' की पड़ताल में हादसों के पीछे के कई चौंकाने वाले कारण सामने आए हैं:
अनियंत्रित गति और लापरवाही
ज्यादातर हादसे तेज रफ्तार ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों के कारण होते हैं। हाईवे पर वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंटरसेप्टर और कैमरों का अभाव है।
'ब्लैक स्पॉट्स' (Black Spots) की अनदेखी
जिले में ऐसे कई स्थान हैं जिन्हें पहले ही 'ब्लैक स्पॉट' (हादसा संभावित क्षेत्र) के रूप में चिन्हित किया गया था, लेकिन वहां सुधार कार्य आज भी अधूरा है। खराब संकेतक, रात के समय रोशनी का अभाव और अचानक घुमावदार मोड़ हादसों को दावत दे रहे हैं।
अतिक्रमण और पार्किंग
स्टेट हाईवे के किनारे अतिक्रमण और सड़कों पर ही वाहनों की अनधिकृत पार्किंग ने सड़क की चौड़ाई को सीमित कर दिया है, जिससे दो वाहनों के गुजरने के दौरान जगह कम पड़ जाती है।
यातायात नियमों का अभाव
हाइवे से गुजरने वाले भारी वाहनों के चालकों में कानून का डर न के बराबर है। बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाना और गलत दिशा से ओवरटेकिंग करना आम बात हो गई है।
क्या कहता है जिला प्रशासन?
इस भयावह स्थिति पर जब हमने संबंधित अधिकारियों से बात की, तो उनके पास केवल आश्वासनों का पिटारा था।
"सड़क सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम हाईवे पर विशेष गश्ती दल (Patrolling) की संख्या बढ़ा रहे हैं और चिन्हित 'ब्लैक स्पॉट्स' को दुरुस्त करने के लिए एनएचएआई (NHAI) को पत्र लिखा गया है। जल्द ही गति सीमा का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" — जिला परिवहन विभाग अधिकारी
दुर्घटनाओं का बढ़ता ग्राफ (छमाही रिपोर्ट)
| महीना | दर्ज हादसे (लगभग) | मृतकों की संख्या |
|---|---|---|
| जनवरी - फरवरी | 45 | 32 |
| मार्च - अप्रैल | 52 | 38 |
| मई - जून | 48 | 35 |
| कुल | 145 | 105 |
समाधान की दिशा: हम क्या कर सकते हैं?
हादसों को कम करने के लिए प्रशासन और आम जनता, दोनों को गंभीर होने की आवश्यकता है:
प्रशासनिक कदम:
हाइवे के मुख्य चौराहों पर 'स्पीड ब्रेकर' और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था।
सड़क किनारे हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए नियमित एंटी-एनक्रोचमेंट ड्राइव।
दुर्घटना के बाद 'गोल्डन आवर' (Golden Hour) के महत्व को समझते हुए एम्बुलेंस सेवा को और अधिक सक्रिय करना।
नागरिक कर्तव्य:
वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग बिल्कुल न करें।
सीट बेल्ट और हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य करें।
थकान या नशे की हालत में वाहन चलाने से बचें।
पूर्णिया की सड़कों पर 6 महीने में 100 से अधिक मौतों का आंकड़ा महज एक सांख्यिकी नहीं, बल्कि 100 परिवारों की बर्बादी है। यह रिपोर्ट एक चेतावनी है—प्रशासन के लिए भी और आम लोगों के लिए भी। यदि समय रहते सड़कों की इंजीनियरिंग, नियमन और हमारी ड्राइविंग आदतों में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह आंकड़ा और भी भयावह हो सकता है।