5 की उम्र में भी सीखने की भूख: कांगड़ा के डॉ. मिल्खी राम, जिनके नाम हैं 32 डिग्रियां
धर्मशाला: अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि शिक्षा और पढ़ाई का एक निश्चित समय होता है, लेकिन कांगड़ा जिले के गंदड़ गांव के रहने वाले 75 वर्षीय डॉ. मिल्खी राम ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से न केवल 32 डिग्रियां हासिल करने का कीर्तिमान स्थापित किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। उनका जीवन आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो चुनौतियों के आगे हार मान लेते हैं।
एक अद्भुत शैक्षिक यात्रा
डॉ. मिल्खी राम की शैक्षणिक यात्रा किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 32 डिग्रियां हासिल करना कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कला, विज्ञान, शिक्षा और कानून जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी दक्षता हासिल की है। उनके द्वारा हासिल की गई डिग्रियों की सूची में स्नातकोत्तर (Masters) की कई उपाधियाँ और विभिन्न डिप्लोमा शामिल हैं।
प्रमुख उपलब्धियां: उन्होंने इतिहास, राजनीति विज्ञान, शिक्षा (M.Ed), समाजशास्त्र जैसे विषयों में अपनी पकड़ मजबूत की है।
निरंतरता: उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी बंद नहीं होने दिया। 75 वर्ष की उम्र में भी वे अपने ज्ञान के दायरे को बढ़ाने के लिए आज भी अध्ययन करते हैं।
क्या है उनका जुनून?
जब डॉ. मिल्खी राम से पूछा गया कि इस उम्र में भी वे क्यों पढ़ते हैं, तो उनका जवाब बेहद गहरा था। उनका मानना है कि "डिग्री सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि ज्ञान की एक खिड़की है।"
उनका जुनून केवल डिग्री बटोरना नहीं है, बल्कि उस विषय की गहराई को समझना है। वे मानते हैं कि जिस दिन इंसान सीखना बंद कर देता है, उसी दिन उसकी प्रगति रुक जाती है। वे अपनी अगली पीढ़ी को यह संदेश देना चाहते हैं कि शिक्षा एक सतत प्रक्रिया (Continuous Process) है जो जीवन के अंतिम क्षण तक चलती रहनी चाहिए।
संघर्ष और सफलता का सफर
गंदड़ गांव जैसे छोटे से ग्रामीण इलाके से निकलकर इतनी बड़ी शैक्षिक उपलब्धियाँ हासिल करना आसान नहीं था।
संसाधनों की कमी: उस दौर में जब वे पढ़ रहे थे, न तो आज जैसी आधुनिक तकनीक थी और न ही इंटरनेट की सुविधा।
दृढ़ इच्छाशक्ति: डॉ. मिल्खी राम ने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। वे बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा पुस्तकालयों और किताबों के बीच बिताया है। उनकी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें वह मुकाम दिलाया, जिसकी कल्पना कम ही लोग कर पाते हैं।
समाज के लिए एक मिसाल
डॉ. मिल्खी राम केवल एक छात्र नहीं हैं, बल्कि वे एक मार्गदर्शक भी हैं। गांव के बच्चे और युवा उनसे प्रेरणा लेते हैं। उनके पास बैठकर बात करने वाले लोग यह महसूस करते हैं कि उम्र सिर्फ एक संख्या है, अगर जज्बा हो तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। उन्होंने न केवल अपने लिए ज्ञान अर्जित किया, बल्कि उन्होंने अपने ज्ञान का उपयोग समाज की बेहतरी के लिए भी किया है।
जीवन से जुड़े कुछ अनमोल सबक
डॉ. मिल्खी राम के जीवन से हमें कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं:
उम्र का बहाना न बनाएं: अक्सर लोग 40-50 की उम्र के बाद पढ़ाई छोड़ने का बहाना ढूंढते हैं, जबकि डॉ. राम 75 की उम्र में नए विषयों पर शोध कर रहे हैं।
जिज्ञासा बनाए रखें: एक सफल व्यक्ति वही है जिसके अंदर हर दिन कुछ नया सीखने की जिज्ञासा हो।
अनुशासन का महत्व: 32 डिग्रियां बिना कठोर अनुशासन और समय प्रबंधन के संभव नहीं थीं। उनका दिन आज भी किताबों को पढ़ने और लिखने के साथ शुरू होता है।
भविष्य की योजनाएं
हैरानी की बात तो यह है कि 32 डिग्रियां होने के बाद भी उनका सफर खत्म नहीं हुआ है। वे अभी भी कुछ नए कोर्स करने और अपनी रुचि के विषयों पर लिखने पर विचार कर रहे हैं। उनके पास मौजूद किताबों का विशाल संग्रह इस बात का प्रमाण है कि उनका घर किसी बड़े विश्वविद्यालय के पुस्तकालय से कम नहीं है।
डॉ. मिल्खी राम का जीवन हम सभी के लिए एक आईना है। उन्होंने दिखा दिया है कि यदि मन में दृढ़ निश्चय हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी यह कहानी केवल हिमाचल प्रदेश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है। हमें उनके इस जज्बे को सलाम करना चाहिए और उनसे प्रेरित होकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।