नहाने गए 17 वर्षीय किशोर मनखुश की डूबने से मौत, परिवार में पसरा मातम

नवगछिया (भागलपुर): कोसी नदी की लहरों ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत आजादनगर टोला के पास कोसी नदी में नहाने गए 17 वर्षीय किशोर मनखुश कुमार की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मनखुश की असमय मौत से उसकी मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है।

घटना का विवरण: मस्ती भरी दोपहर और अचानक छाया सन्नाटा

मिली जानकारी के अनुसार, घटना बुधवार की है। मनखुश अपने दोस्तों के साथ कोसी नदी के तट पर गया था। चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए वे सभी नदी में नहाने उतरे। मनखुश पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा सका और देखते ही देखते तेज बहाव की चपेट में आ गया।

उसके साथ मौजूद दोस्तों ने उसे बचाने का शोर मचाया, लेकिन तब तक मनखुश गहरे पानी में ओझल हो चुका था। दोस्तों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन कोसी के उफनते पानी में उसे ढूंढना मुश्किल साबित हो रहा था।

प्रशासनिक तत्परता और शव की बरामदगी

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद स्थानीय तैराकों की मदद से किशोर के शव को नदी से बाहर निकाला जा सका। शव मिलते ही तट पर मौजूद भीड़ में चीख-पुकार मच गई।

नवगछिया पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई पूरी की। तत्पश्चात, शव को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने इस संबंध में एक यूडी (यूडी) केस दर्ज किया है।

परिजन का क्रंदन: उजड़ गया सपनों का संसार

मनखुश की मौत की खबर जैसे ही उसके घर पहुंची, उसकी मां बदहवास होकर गिर पड़ी। 'मेरा लाल वापस आ जाओ' की गूंज से आसपास के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। मनखुश अपने माता-पिता की उम्मीदों का चिराग था। 17 साल की कच्ची उम्र में उसकी मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

ग्रामीणों ने बताया कि मनखुश पढ़ाई में मेधावी था और अपने स्वभाव से सबका प्रिय था। उसकी ऐसी असमय विदाई ने पूरे आजादनगर टोला के निवासियों को झकझोर दिया है।

कोसी की लहरें और बढ़ता खतरा

नवगछिया का यह इलाका कोसी नदी से घिरा हुआ है। अक्सर गर्मी के दिनों में बच्चे और युवा नदी में नहाने जाते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित होता है।

नदी का अनिश्चित बहाव: कोसी नदी का तल और बहाव बहुत अनिश्चित होता है। एक कदम की दूरी पर पानी का स्तर एकाएक बदल जाता है, जिससे अच्छे तैराक भी गच्चा खा जाते हैं।

चेतावनी का अभाव: नदी के किनारों पर किसी भी प्रकार के चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा घेरे का न होना भी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ और प्रशासन?

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के खतरनाक हिस्सों में नहाने न जाएं। मानसून के दौरान और उसके बाद नदी का जलस्तर कब बढ़ जाए, इसका कोई भरोसा नहीं रहता।

समाजसेवियों ने इस घटना पर दुख जताते हुए मांग की है कि नदी के मुख्य घाटों पर प्रशासन को सुरक्षा कर्मियों की तैनाती करनी चाहिए और लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाना चाहिए ताकि कोई और 'मनखुश' कोसी की भेंट न चढ़े।

 एक सीख जो बहुत भारी कीमत पर मिली

मनखुश की मौत एक ऐसी क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। यह घटना अभिभावकों के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। किशोरों की सक्रियता और उनका नदी की ओर जाना खतरनाक हो सकता है। समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर ऐसे क्षेत्रों को 'नो-स्विमिंग ज़ोन' घोषित करना चाहिए।

आज आजादनगर टोला में चूल्हे नहीं जले, क्योंकि गांव का एक होनहार बच्चा कोसी में समा गया। मनखुश अब कभी वापस नहीं आएगा, लेकिन उसकी यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक कोसी की गोद में ऐसे युवा काल के गाल में समाते रहेंगे?