बिजली तार चोरी मामले में पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल, आवेदन के महीनों बाद भी दर्ज नहीं हुई एफआईआर; पीड़ित न्याय की आस में
मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। बरियारपुर थाना क्षेत्र में बिजली तार चोरी की घटना के बावजूद पीड़ित की शिकायत पर महीनों बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि 6 अगस्त 2025 को संबंधित थाना में लिखित आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही मामले में कोई ठोस कार्रवाई की गई है। इससे पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मामला अब केवल बिजली तार चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, शिकायतों के निस्तारण और कानून व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की जाती, तो आरोपितों की पहचान कर चोरी का खुलासा किया जा सकता था।
छह अगस्त 2025 को दिया गया था आवेदन
जानकारी के अनुसार बरियारपुर थाना क्षेत्र में बिजली आपूर्ति से जुड़े तारों की चोरी की घटना सामने आई थी। घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने सभी आवश्यक तथ्यों के साथ 6 अगस्त 2025 को थाना में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।
आवेदन में चोरी की पूरी घटना, संभावित नुकसान और आवश्यक कार्रवाई की मांग का उल्लेख किया गया था। लेकिन आरोप है कि आवेदन प्राप्त होने के बावजूद पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया।
एफआईआर दर्ज नहीं होने से बढ़ी परेशानी
एफआईआर दर्ज नहीं होने के कारण पीड़ित को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली तार चोरी होने से क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे आम लोगों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
पीड़ित का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से न तो जांच आगे बढ़ रही है और न ही चोरी गए सामान की बरामदगी की दिशा में कोई प्रयास दिखाई दे रहा है।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस यदि शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई करती तो मामले का खुलासा होने की संभावना अधिक थी। लेकिन लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने से अपराधियों का मनोबल बढ़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि चोरी जैसी घटनाओं में प्रारंभिक जांच और त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि इसमें देरी होती है तो साक्ष्य कमजोर पड़ जाते हैं और आरोपितों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
बिजली विभाग को भी हुआ नुकसान
बिजली तार चोरी की घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं होतीं, बल्कि इससे सरकारी संपत्ति को भी भारी नुकसान होता है। चोरी के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होती है और विभाग को नए तार लगाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
इसके अलावा लंबे समय तक बिजली बाधित रहने से किसानों, छोटे व्यवसायियों और आम उपभोक्ताओं को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
पीड़ित ने कार्रवाई की लगाई गुहार
पीड़ित पक्ष ने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर कानूनी कार्रवाई नहीं हुई तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना और कठिन हो जाएगा।
पीड़ित ने यह भी मांग की है कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में कराई जाए ताकि निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
कानूनी प्रक्रिया में एफआईआर का महत्व
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संज्ञेय अपराध में प्राप्त शिकायत पर नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद ही जांच की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होती है।
यदि प्राथमिकी दर्ज करने में अनावश्यक देरी होती है तो इससे जांच की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और पीड़ित को न्याय मिलने में भी विलंब होता है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों में भी असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि पुलिस शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं करेगी तो आम लोगों का कानून व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की उम्मीद
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि मामले की जानकारी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचेगी तो जल्द कार्रवाई संभव हो सकती है। उन्होंने एसएसपी और अन्य अधिकारियों से मामले की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।
पुलिस की जिम्मेदारी पर फिर चर्चा
इस घटना के बाद एक बार फिर पुलिस की जवाबदेही और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई और पारदर्शी जांच ही अपराध नियंत्रण की सबसे प्रभावी व्यवस्था है।
यदि प्रारंभिक स्तर पर ही लापरवाही बरती जाती है तो इससे अपराधियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाना कठिन हो जाता है और पीड़ितों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।
मुजफ्फरपुर के बरियारपुर थाना क्षेत्र में बिजली तार चोरी के मामले में महीनों बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पीड़ित लगातार न्याय की मांग कर रहा है, जबकि स्थानीय लोग भी मामले में शीघ्र कार्रवाई चाहते हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और क्या मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू की जाती है। यदि समय रहते कार्रवाई होती है तो न केवल पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।