तत्काल प्रभाव से हटाए जाएंगे प्राचार्य, नए असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवा संपुष्टि पर लगी अंतिम मुहर

तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के प्रशासनिक और शैक्षणिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित सिंडिकेट (Syndicate) की उच्च स्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण और कड़े फैसले लिए गए हैं। सिंडिकेट के सदस्यों के बीच गहन विचार-विमर्श और हंगामेदार बहस के बाद, अनियमितताओं के आरोपों से घिरे कॉलेज के प्राचार्य (Principal) को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने पर आम सहमति बन गई है।

इसके साथ ही, पिछले लंबे समय से अपनी सेवा नियमितीकरण का इंतजार कर रहे विश्वविद्यालय के नए असिस्टेंट प्रोफेसरों (Assistant Professors) के लिए यह बैठक वरदान साबित हुई है; सिंडिकेट ने सर्वसम्मति से उनकी सेवा संपुष्टि (Service Confirmation) के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों में जहां भारी उत्साह है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है।

सिंडिकेट की बैठक में प्राचार्य पर गिरी गाज: जानिए पूरा मामला

विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले एक प्रमुख अंगीभूत कॉलेज के प्राचार्य के खिलाफ पिछले कई महीनों से वित्तीय अनियमितता, प्रशासनिक मनमानी और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें राजभवन (चांसलर कार्यालय) और विश्वविद्यालय प्रशासन को मिल रही थीं। सिंडिकेट की बैठक में इस मुद्दे पर सदस्यों ने कड़ा रुख अख्तियार किया।

 हटाने पर क्यों बनी सहमति?

बैठक के दौरान जांच समिति द्वारा सौंपी गई आंतरिक रिपोर्ट को पटल पर रखा गया। रिपोर्ट में प्राचार्य के खिलाफ लगे कई गंभीर आरोपों को सही पाया गया। सिंडिकेट के सदस्यों ने एक सुर में कहा कि ऐसे विवादित आचरण वाले व्यक्ति को पद पर बनाए रखने से विश्वविद्यालय और कॉलेज की छवि धूमिल हो रही है।

वित्तीय हेरफेर: कॉलेज के आंतरिक फंड और विकास कोष की राशि को बिना उचित वित्तीय स्वीकृति के खर्च करने का आरोप।

सीनियरिटी की अनदेखी: कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापकों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से कमेटियों का गठन करना।

प्रशासनिक शिथिलता: शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने में नाकाम रहना और छात्रों की शिकायतों का निवारण न करना।

कुलपति ने सिंडिकेट की राय का सम्मान करते हुए स्पष्ट किया कि राजभवन के निर्देशों के आलोक में संबंधित प्राचार्य को पद से मुक्त करने की अधिसूचना (Notification) जल्द ही जारी कर दी जाएगी और कॉलेज के सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर को प्रभारी प्राचार्य का जिम्मा सौंपा जाएगा।

 नए असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए बड़ी खुशखबरी: सेवा हुई संपुष्ट

सिंडिकेट की इस बैठक का दूसरा और सबसे सकारात्मक पहलू नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों से जुड़ा रहा। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के माध्यम से बहाल हुए विभिन्न विषयों के दर्जनों नए असिस्टेंट प्रोफेसरों की दो साल की परिवीक्षा अवधि (Probation Period) पूरी होने के बाद भी उनकी सेवा संपुष्टि का मामला अटका हुआ था।

सेवा संपुष्टि (Service Confirmation) के मायने और फायदे:

सिंडिकेट द्वारा सेवा संपुष्टि के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब ये सभी असिस्टेंट प्रोफेसर विश्वविद्यालय के 'स्थायी कैडर' का हिस्सा बन गए हैं। इसके तहत उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:

वेतन वृद्धि और एरियर (Increment & Arrears): स्थायीकरण होने के साथ ही इन प्रोफेसरों के सालाना वेतन वृद्धि का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही प्रोबेशन पीरियड के दौरान के बकाये भत्तों का भुगतान भी सुनिश्चित होगा।

प्रमोशन का आधार (Career Advancement Scheme): यूजीसी (UGC) के नियमानुसार, भविष्य में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रमोशन (CAS) के लिए सेवा संपुष्टि की तिथि को ही आधार माना जाता है। इस फैसले से उनके करियर ग्रोथ का रास्ता खुल गया है।

भविष्य निधि और अन्य सुविधाएं: अब ये शिक्षक ईपीएफ (EPF), ग्रेच्युटी और अन्य सरकारी लोन व सुविधाओं के लिए पूर्ण रूप से पात्र हो गए हैं।

सीनेट और राजभवन के आगामी एजेंडे पर चर्चा

सिंडिकेट की इस बैठक में केवल दंडात्मक और सेवा संबंधी फैसले ही नहीं लिए गए, बल्कि विश्वविद्यालय के आगामी बजट और शैक्षणिक कैलेंडर को सुधारने पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

लंबित परीक्षाओं का संचालन: सत्र को नियमित करने के लिए बैकलॉग परीक्षाओं को दो महीने के भीतर आयोजित करने का निर्देश परीक्षा नियंत्रक को दिया गया है।

नया इंफ्रास्ट्रक्चर बजट: विभिन्न कॉलेजों में प्रयोगशालाओं (Labs) और पुस्तकालयों (Libraries) के आधुनिकीकरण के लिए बजट प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसे आगामी सीनेट (Senate) की बैठक में अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

 शिक्षक संघ और छात्र संगठनों ने जताया आभार

सिंडिकेट के इस दोहरे फैसले का विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ (TMBUTA) ने पुरजोर स्वागत किया है। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि नए असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवा संपुष्टि का निर्णय ऐतिहासिक है, जिससे युवा शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और वे पूरी ऊर्जा के साथ छात्रों के अध्यापन में जुटेंगे।

वहीं दूसरी ओर, छात्र संगठनों ने भ्रष्ट प्राचार्य को हटाए जाने के फैसले को 'छात्र शक्ति की जीत' बताया है। छात्रों का कहना था कि कॉलेज कैंपस में तानाशाही रवैया अपनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई समय-समय पर बहुत जरूरी है ताकि शैक्षणिक माहौल दूषित न हो।

सिंडिकेट बैठक के मुख्य निर्णय (At a Glance)

एजेंडा / विषयसिंडिकेट द्वारा लिया गया अंतिम निर्णयसंभावित प्रभाव
विवादित प्राचार्य का मामलातत्काल प्रभाव से पद से हटाने पर पूर्ण आम सहमति बनी।कॉलेज में प्रशासनिक सुधार होगा, वरिष्ठ प्रोफेसर को मिलेगा प्रभार।
नए असिस्टेंट प्रोफेसरप्रोबेशन पीरियड पूरा होने के बाद सेवा संपुष्टि (Confirmation) मंजूरशिक्षकों को मिलेगा स्थायी कैडर, वेतन वृद्धि और प्रमोशन का लाभ।
परीक्षा एवं सत्र नियमितीकरणबैकलॉग परीक्षाओं को दो महीने में कराने का सख्त निर्देश।छात्रों का सत्र समय पर पूरा होगा, डिग्री समय पर मिलेगी।
वित्तीय घाटा व इंफ्रास्ट्रक्चरनए लैब और लाइब्रेरी बजट को सीनेट के लिए अग्रेषित किया गया।कॉलेजों में शोध और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा मिलेगा।

तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की इस सिंडिकेट बैठक ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अब 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रहा है। जहाँ एक तरफ गलत काम करने वाले अधिकारियों और प्राचार्यों के खिलाफ तत्काल निलंबन या हटाने जैसी कठोर कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ ईमानदारी से सेवा दे रहे नए असिस्टेंट प्रोफेसरों के हक को समय पर देकर उनके अधिकारों की रक्षा की जा रही है। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि सिंडिकेट इसी तरह निष्पक्ष और त्वरित निर्णय लेता रहा, तो विश्वविद्यालय का खोया हुआ गौरव और शैक्षणिक सत्र का समयबद्ध संचालन जल्द ही पटरी पर लौट आएगा।