वेतन भुगतान में देरी से नाराज पटना नगर निगम के वाहन चालक हड़ताल पर, 75 वार्डों में ठप हुई सफाई व्यवस्था

पटना, जागरण टीम। राजधानी पटना में सफाई व्यवस्था मंगलवार को गंभीर रूप से प्रभावित हो गई जब पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों में कार्यरत वाहन चालक अचानक हड़ताल पर चले गए। वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी और बकाया राशि का भुगतान नहीं किए जाने से नाराज चालकों ने कामकाज बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके चलते शहर के विभिन्न इलाकों में कचरा उठाव का कार्य पूरी तरह बाधित हो गया और कई स्थानों पर कचरे का अंबार लग गया।

हड़ताल का असर सुबह से ही राजधानी के अधिकांश मोहल्लों और वार्डों में देखने को मिला। सामान्य दिनों में जहां सुबह-सुबह कचरा उठाव वाहन घर-घर पहुंचते हैं, वहीं मंगलवार को एक भी वाहन कई क्षेत्रों में नहीं पहुंचा। परिणामस्वरूप लोगों को अपने घरों का कचरा जमा रखना पड़ा और कई स्थानों पर सड़कों तथा गलियों के किनारे कचरे के ढेर दिखाई देने लगे।

वाहन चालकों ने मीना बाजार स्थित अंचल कार्यालय के मुख्य गेट पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लंबे समय से वेतन भुगतान में अनियमितता और बकाया राशि की समस्या से जूझ रहे हैं। कई बार संबंधित एजेंसी और अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रखने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्रदर्शन में शामिल चालकों का कहना था कि वे नगर निगम के सफाई कार्य की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि कई महीनों से वेतन भुगतान में देरी हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।

कामगार यूनियन के संगठन सचिव सनी कुमार ने कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद बकाया भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि वाहन चालक लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर मजदूरी और वेतन नहीं मिल रहा है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, आंदोलन जारी रह सकता है।

प्रदर्शन में वाहन चालक राजीव गुप्ता, मोहम्मद सद्दाम, रोहित कुमार समेत बड़ी संख्या में चालक और सफाई कार्य से जुड़े कर्मचारी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में समय पर वेतन भुगतान और बकाया राशि जारी करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर कई बार अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।

हड़ताल का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा है। राजधानी के कई मोहल्लों में कचरा उठाव नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर घरेलू कचरा घरों के बाहर जमा हो गया, जबकि बाजार क्षेत्रों में भी साफ-सफाई प्रभावित हुई। लोगों का कहना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो दुर्गंध और गंदगी की समस्या बढ़ सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि बरसात के मौसम में कचरे का लंबे समय तक जमा रहना कई प्रकार की बीमारियों को जन्म दे सकता है। खुले में पड़े कचरे से मच्छरों और अन्य कीटों की संख्या बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक रोग फैल सकते हैं। इसलिए सफाई व्यवस्था का सुचारू रूप से चलना बेहद जरूरी है।

नगर निगम के अधिकारियों ने हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि चालकों की मांगों और समस्याओं पर विचार किया जा रहा है। संबंधित एजेंसी से भी बातचीत की जा रही है ताकि जल्द से जल्द समाधान निकाला जा सके और सफाई व्यवस्था को सामान्य बनाया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, नगर निगम प्रशासन और एजेंसी प्रतिनिधियों के बीच वार्ता की संभावना है। अधिकारियों का प्रयास है कि कर्मचारियों को मनाकर जल्द काम पर लौटाया जाए ताकि शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित न हो। हालांकि प्रदर्शनकारी कर्मचारी स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

पटना नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन हजारों टन कचरे का संग्रहण और निष्पादन किया जाता है। इसके लिए बड़ी संख्या में वाहन और कर्मचारी तैनात रहते हैं। वाहन चालकों की हड़ताल के कारण पूरा सिस्टम प्रभावित हो गया है। यदि हड़ताल लंबी चली तो शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, लेकिन साथ ही शहर की सफाई व्यवस्था भी बाधित नहीं होनी चाहिए। लोगों ने नगर निगम से वैकल्पिक व्यवस्था करने की भी मांग की है ताकि आम जनता को परेशानी न हो।

राजधानी पटना को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नगर निगम लगातार अभियान चलाता रहा है। ऐसे में सफाई कर्मियों और वाहन चालकों की हड़ताल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। यह मामला न केवल कर्मचारियों की आर्थिक समस्याओं से जुड़ा है, बल्कि शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वच्छता से भी संबंधित है।

फिलहाल सभी की निगाहें नगर निगम प्रशासन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि जल्द समझौता नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में शहर में कचरे की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। वहीं कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दे रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र समाधान निकालना आवश्यक हो गया है।