बेटे की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर मां की भूख हड़ताल, परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की उठाई मांग
पटना। चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। भरत तिवारी की मां ने अपने बेटे की मौत के मामले में कथित दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है। उनके साथ इस आंदोलन में भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी, बसंत तिवारी, बहन रूबी कुमारी और भाभी भी शामिल होंगी। परिवार का कहना है कि उन्होंने पहले भी प्रशासन और सरकार से कई बार न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। इसलिए उन्होंने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से भूख हड़ताल का रास्ता चुना है।
परिजनों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने बेटे के मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। परिवार का आरोप है कि घटना के बाद से उन्होंने संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार अपनी बातें रखीं, लेकिन अब तक उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हो सका। इसी कारण वे आंदोलन करने के लिए मजबूर हुए हैं।
भरत तिवारी की मां ने कहा कि जब तक मामले में कथित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं होती और उन्हें न्याय का भरोसा नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि न्याय और सत्य सामने लाने के उद्देश्य से है। परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप संचालित किया जाएगा।
भूख हड़ताल में परिवार के अन्य सदस्य भी सक्रिय रूप से शामिल होंगे। भाई चंदन तिवारी और बसंत तिवारी ने कहा कि वे अपनी मां के साथ हर परिस्थिति में खड़े हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते रहेंगे। बहन रूबी कुमारी और अन्य परिजनों ने भी कहा कि वे न्याय मिलने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे। परिवार का मानना है कि यदि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो, तो पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है।
इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी भी संवेदनशील मामले में सभी तथ्यों की जांच कानून के दायरे में रहकर की जानी चाहिए, ताकि सत्य सामने आ सके और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक जांच के आधार पर निष्पक्ष जांच करना है। यदि किसी पक्ष को जांच पर आपत्ति होती है, तो वह कानून के तहत उपलब्ध वैधानिक उपायों का भी सहारा ले सकता है। साथ ही किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि केवल सक्षम न्यायालय द्वारा विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होती है।
भूख हड़ताल को लेकर स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। यदि परिवार प्रशासन को कोई ज्ञापन सौंपता है, तो उसे संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने की अपील की है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस मामले की चर्चा हो रही है। विभिन्न संगठनों का कहना है कि यदि किसी परिवार को न्याय की मांग को लेकर आंदोलन करना पड़ रहा है, तो संबंधित एजेंसियों को मामले की प्रगति और जांच की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इससे लोगों के बीच पारदर्शिता बनी रहती है और भ्रम की स्थिति कम होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत आते हैं, बशर्ते वे कानून और सार्वजनिक व्यवस्था के दायरे में आयोजित किए जाएं। वहीं प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वह प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनकी शिकायतों को नियमानुसार संबंधित स्तर तक पहुंचाए।
फिलहाल भरत तिवारी की मां और परिवार द्वारा प्रस्तावित भूख हड़ताल को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और जांच एजेंसियां परिवार की मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
परिवार का कहना है कि उनका संघर्ष न्याय मिलने तक जारी रहेगा। वहीं प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मामले की निगरानी करने की बात कही है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन और मामले से जुड़े घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।