पूर्णिया शहर में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल: ऑटो एवं ई-रिक्शा के लिए लागू की गई कलर कोडिंग व्यवस्था, जाम से मिलेगी राहत
बिहार के तेजी से उभरते महानगर पूर्णिया में यातायात व्यवस्था (Traffic Management) को पूरी तरह दुरुस्त, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन और यातायात पुलिस विभाग द्वारा एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शहर में आए दिन लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम और अनियंत्रित वाहनों की भीड़ पर लगाम लगाने के लिए शहर के ऑटो और ई-रिक्शा के लिए कलर कोडिंग (Color Coding) व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब पूर्णिया शहर के विभिन्न रूटों पर चलने वाले ऑटो और ई-रिक्शा अपने निर्धारित रंगों की पहचान के साथ ही सड़कों पर दौड़ेंगे, जिससे न केवल शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि आम नागरिकों और यात्रियों को भी आवागमन में भारी सहूलियत मिलेगी। प्रशासन के इस सख्त और जनहितैषी फैसले से वाहन चालकों और शहरवासियों के बीच चर्चा का माहौल गर्म है।
कलर कोडिंग की आवश्यकता क्यों पड़ी? वर्तमान यातायात समस्याओं का विश्लेषण
पूर्णिया शहर पिछले कुछ वर्षों में व्यावसायिक और शैक्षणिक गतिविधियों का एक बड़ा हब बन चुका है, जिसके कारण यहां वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
अनियंत्रित वाहनों की भीड़ और जाम की समस्या: शहर के प्रमुख चौक-चौराहों जैसे कि आर.के. साहा, झंडा चौक, लाइन बाजार, कचहरी चौक और नगर निगम क्षेत्र के अन्य व्यस्त मार्गों पर ऑटो और ई-रिक्शा चालकों द्वारा कहीं भी वाहन खड़ा कर दिए जाने के कारण रोजाना ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या उत्पन्न होती थी।
रूट का उल्लंघन और मनमाना किराया: अब तक बिना किसी निश्चित रूट चार्ट के वाहन चलाने के कारण कई चालक शहर के किसी भी कोने में अपनी मर्जी से वाहन लेकर चले जाते थे, जिससे नियमों की धज्जियां उड़ती थीं। इस अराजकता को समाप्त करने और शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कलर कोडिंग और रूट निर्धारण को ही एकमात्र ठोस उपाय माना है।
नई कलर कोडिंग व्यवस्था की मुख्य रूपरेखा और रूट निर्धारण
इस नई व्यवस्था के तहत पूर्णिया शहर को अलग-अलग जोन्स और रूट्स में बांटा गया है, जिसके लिए विशेष रंगों का चयन किया गया है।
रूट के अनुसार रंगों का निर्धारण: यातायात विभाग द्वारा शहर के अलग-अलग मुख्य मार्गों (जैसे पूर्णिया जंक्शन से बस स्टैंड, खुश्कीबाग से कचहरी चौक आदि) के लिए ऑटो और ई-रिक्शा को अलग-अलग रंगों से रंगा जाएगा या उस रंग का विशिष्ट स्टीकर लगाया जाएगा। इससे दूर से ही यह पहचान हो सकेगी कि कौन सा वाहन किस निर्धारित रूट का है।
रूट से बाहर परिचालन पर रोक: यदि कोई वाहन अपने निर्धारित रूट या कलर कोडिंग क्षेत्र से बाहर बिना अनुमति के चलता पाया जाता है, तो उस पर भारी जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी और वाहन को जब्त तक किया जा सकता है। इससे शहर के आंतरिक हिस्सों में अनावश्यक वाहनों का दबाव कम होगा।
चालकों के लिए कड़े निर्देश और प्रशासनिक तैयारी
यातायात पुलिस और जिला परिवहन विभाग ने इस योजना को धरातल पर पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए कमर कस ली है।
अनिवार्य कागजात और पहचान पत्र: कलर कोडिंग स्टीकर प्राप्त करने के लिए सभी वाहन चालकों और मालिकों को अपने वाहनों के वैध कागजात (जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र) संबंधित विभाग में दिखाने होंगे। इसके बाद ही उन्हें रूट के अनुसार कलर कोडिंग और यूनिक आईडी नंबर जारी किया जाएगा।
यातायात नियमों का पाठ: चालकों को हिदायत दी गई है कि वे निर्धारित स्थानों पर ही अपने वाहन रोकें और सवारियों को चढ़ाएं-उतारें। सड़क के बीचों-बीच वाहन खड़ा करने वालों के खिलाफ यातायात पुलिस विशेष अभियान चलाकर चालान काटेगी।
नागरिकों और यात्रियों की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन के इस कदम का शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, बुद्धिजीवियों और दैनिक यात्रियों ने दिल से स्वागत किया है।
जाम से मुक्ति की उम्मीद: शहरवासियों का कहना है कि यदि यह नियम पूरी ईमानदारी और सख्ती से लागू किया गया, तो निश्चित रूप से पूर्णियावासियों को रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
सुरक्षा और पारदर्शिता: महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी यह व्यवस्था सुरक्षित साबित होगी, क्योंकि अब हर वाहन की एक निश्चित पहचान और प्रशासनिक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
पूर्णिया शहर में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ऑटो एवं ई-रिक्शा की कलर कोडिंग लागू करने का यह निर्णय एक क्रांतिकारी कदम है। जब प्रशासन के कड़े नियम और जनता का सहयोग आपस में मिलेंगे, तो पूर्णिया एक सुव्यवस्थित, स्वच्छ और जाम-मुक्त शहर के रूप में अपनी एक नई पहचान स्थापित करेगा।