नालंदा में समाज के दो लोगों की हत्या के विरोध में गहलोत क्षत्रिय दुसाध पासवान महासभा का पैदल मार्च, दोषियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवारों को न्याय की मांग
मुजफ्फरपुर: बिहार के नालंदा जिले में समाज के दो लोगों की हत्या के विरोध में गहलोत क्षत्रिय दुसाध पासवान महासभा ने मुजफ्फरपुर में पैदल मार्च निकालकर अपनी नाराजगी जताई। बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने इस विरोध मार्च में भाग लिया और राज्य सरकार से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच तथा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। मार्च का नेतृत्व महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रो. अवधेश पासवान ने किया।
संगठन के सदस्यों ने कहा कि समाज के निर्दोष लोगों की हत्या अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने सरकार से अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
शांतिपूर्ण पैदल मार्च के माध्यम से जताया विरोध
महासभा द्वारा निकाला गया पैदल मार्च शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा। इस दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर न्याय की मांग से जुड़े नारे लगाए। पूरे कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखा गया और लोगों से कानून का पालन करते हुए अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखने की अपील की गई।
मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि अपराधियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई ही पीड़ित परिवारों को न्याय दिला सकती है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।
प्रो. अवधेश पासवान ने रखी मांगें
पैदल मार्च का नेतृत्व कर रहे प्रो. अवधेश पासवान ने कहा कि समाज के दो लोगों की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि इससे पूरे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने यह भी मांग की कि पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता, सुरक्षा तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए ताकि वे इस कठिन समय में अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित कर सकें।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेजा ज्ञापन
महासभा के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम संबोधित किया है। ज्ञापन में घटना की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, त्वरित न्यायिक प्रक्रिया तथा पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की मांग की गई है।
संगठन का कहना है कि यदि दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो समाज में कानून के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है।
पीड़ित परिवारों के लिए सहायता की मांग
महासभा ने सरकार से मांग की कि मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही परिवार के योग्य सदस्यों को सरकारी नौकरी, बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
संगठन के सदस्यों ने कहा कि आर्थिक सहायता के साथ-साथ सामाजिक और प्रशासनिक सहयोग भी पीड़ित परिवारों के लिए बेहद आवश्यक है।
कानून-व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
वक्ताओं ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। अपराध की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस गश्त बढ़ाने, त्वरित जांच और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर बल दिया गया।
उन्होंने कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और अपराधियों को उनके किए की सजा समय पर मिलनी चाहिए। इससे समाज में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
बड़ी संख्या में शामिल हुए समाज के लोग
पैदल मार्च में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए न्याय की मांग का समर्थन किया।
प्रतिभागियों ने कहा कि समाज के लोग हमेशा शांति, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा
मार्च के समापन पर वक्ताओं ने जिला प्रशासन और पुलिस से निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई होगी तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत होगा।
संगठन ने प्रशासन से अपील की कि मामले की जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा सभी आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द कानून के दायरे में लाया जाए।
न्याय की मांग के साथ कार्यक्रम संपन्न
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। महासभा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव पैदा करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाना है।
संगठन ने उम्मीद जताई कि सरकार और प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे तथा दोषियों के खिलाफ शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के हर व्यक्ति की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।