मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में गंगा का जलस्तर बढ़ा; कुरसेला में कोसी नदी खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर
बिहार में मानसून की भारी बारिश के बाद नदियों के जलस्तर में तेजी से उफान आने लगा है, जिससे राज्य के कई जिलों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) और जल संसाधन विभाग से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, गंगा नदी के जलस्तर में मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, कोसी नदी ने भी रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है और कटिहार के कुरसेला में यह खतरे के निशान को पार करते हुए 11 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
नदियों के इस बढ़ते जलस्तर ने जल संसाधन विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। तटबंधों (Embankments) की सुरक्षा के लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है और निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है।
गंगा नदी की स्थिति: मुंगेर से कहलगांव तक बढ़ता दबाव
गंगा नदी के जलस्तर में हो रही वृद्धि के कारण भागलपुर और मुंगेर संभाग के तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने की आशंका प्रबल हो गई है।
मुंगेर में जलस्तर की स्थिति
मुंगेर में गंगा नदी के जलस्तर में पिछले 24 घंटों से लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऊपरी इलाकों और उत्तर भारत की नदियों से आ रहे अतिरिक्त पानी के कारण मुंगेर के बबुआ घाट, कष्टहरणी घाट और आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी का फैलाव शुरू हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, यदि जलस्तर बढ़ने की यही रफ्तार रही, तो अगले दो दिनों में मुंगेर में गंगा खतरे के निशान को छू सकती है। दियारा (नदी के बीच के टापू) इलाकों के किसानों की फसलें डूबने कगार पर हैं।
भागलपुर (सुल्तानगंज और सिल्क सिटी) में उफान
भागलपुर शहर और सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम में गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियों को पार कर ऊपर की ओर बढ़ रहा है। सुल्तानगंज में नमामि गंगे घाट के कई हिस्से पानी में डूब चुके हैं। भागलपुर शहर के सबौर, नाथनगर और जगदीशपुर प्रखंड के निचले गांवों में गंगा का बैकवाटर (उलटा पानी) प्रवेश करने लगा है, जिससे स्थानीय किसानों की सब्जियों और चारे की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।
कहलगांव में स्थिति चिंताजनक
कहलगांव में गंगा नदी का रुख बेहद आक्रामक होता जा रहा है। यहाँ भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, कहलगांव में प्रति घंटे 1 से 1.5 सेंटीमीटर की दर से पानी बढ़ रहा है। यहाँ के तटीय इलाकों और एनटीपीसी (NTPC) के निचले क्षेत्रों के आसपास जलभराव की स्थिति पैदा होने लगी है।
कोसी का कहर: कुरसेला में खतरे के निशान से 11 सेमी ऊपर
बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी ने एक बार फिर सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कोसी बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।
कुरसेला में खतरे का निशान पार: कटिहार जिले के कुरसेला में, जहाँ कोसी और गंगा का संगम होता है, कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को 11 सेंटीमीटर पार कर चुका है।
तटबंधों पर बढ़ा दबाव: कुरसेला के पास रेलवे पुल और राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-31) के आसपास के क्षेत्रों में नदी का बहाव बेहद तेज है। पानी खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण सुरक्षात्मक तटबंधों पर भारी दबाव बन रहा है।
दर्जनों गांव जलमग्न: कोसी का पानी कुरसेला और आसपास के तीन से चार पंचायतों के निचले गांवों में प्रवेश कर गया है। सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है, जिससे ग्रामीणों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूटने लगा है।
दियारा और निचले इलाकों में पलायन शुरू
नदियों के इस उफान के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दियारा (नदी तटीय मैदानों) के निवासियों को हो रही है। मुंगेर, भागलपुर, नवगछिया और कटिहार के दियारा इलाकों से लोगों का पलायन शुरू हो गया है।
चारे और मवेशियों की समस्या: बाढ़ का पानी खेतों में घुसने से पशुओं के लिए हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण नावों के सहारे अपने मवेशियों (गायों, भैंसों) को लेकर ऊंचे स्थानों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे शरण ले रहे हैं।
नावों की कमी: कई गांवों के लोगों ने शिकायत की है कि जलस्तर तेजी से बढ़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से पर्याप्त संख्या में सरकारी नावें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिससे उन्हें ऊंचे स्थानों पर जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की तैयारी और फ्लड फाइटिंग (Flood Fighting) कार्य
स्थिति को देखते हुए बिहार के जल संसाधन मंत्री और विभाग के आला अधिकारियों ने हाई-लेवल मीटिंग की है। मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे तौर पर स्थिति की मॉनिटरिंग की जा रही है।
24 घंटे निगरानी: मुंगेर, भागलपुर, कहलगांव और कुरसेला में अभियंताओं (Engineers) की टीम को 24 घंटे कैंप करने का निर्देश दिया गया है। तटबंधों पर 'फ्लड फाइटिंग' सामग्रियां जैसे- सैंड बैग्स (बालू की बोरियां), बोल्डर और जियो बैग्स पर्याप्त मात्रा में जमा कर लिए गए हैं ताकि किसी भी कटाव (Erosion) को तुरंत रोका जा सके।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ अलर्ट: भागलपुर और कटिहार में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति में ग्रामीणों को रेस्क्यू करने के लिए मोटर बोट तैयार रखी गई हैं।
कंट्रोल रूम सक्रिय: जल संसाधन विभाग ने पटना और जिला मुख्यालयों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष (Flood Control Rooms) को सक्रिय कर दिया है, जहां पल-पल की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
मुख्य नदियों के जलस्तर का तुलनात्मक विवरण
| जिला/स्थान | नदी का नाम | वर्तमान स्थिति | प्रभाव/चेतावनी |
|---|---|---|---|
| मुंगेर | गंगा | लगातार बढ़ोतरी | दियारा इलाकों में पानी फैला, फसलों को नुकसान |
| भागलपुर | गंगा | खतरे के निशान के करीब | घाट जलमग्न, निचले इलाकों में अलर्ट |
| कहलगांव | गंगा | तेजी से बढ़ता जलस्तर | तटीय रिहायशी इलाकों पर बाढ़ का खतरा |
| कुरसेला (कटिहार) | कोसी | खतरे के निशान से 11 सेमी ऊपर | सड़कों पर पानी, तटबंधों पर भारी दबाव |
मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों में उत्तर बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट (Yellow/Orange Alert) जारी किया है। यदि पहाड़ों पर बारिश थमी नहीं, तो कोसी बैराज से और अधिक पानी छोड़ा जा सकता है, जिससे कुरसेला में स्थिति और भयावह हो सकती है। वहीं गंगा नदी में उफान जारी रहने से मुंगेर और भागलपुर के शहरी इलाकों की सुरक्षा प्रणालियों पर भी दबाव बढ़ेगा। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और नदी के किनारे या गहरे पानी वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। सरकार स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है।