लोकभवन के निर्देश पर टीएमबीयू में भी फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम की होगी शुरुआत, शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
भागलपुर। राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से अब शिक्षकों के कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में लोकभवन के निर्देश के बाद अब तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में भी फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) की शुरुआत की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020), आधुनिक शिक्षण तकनीकों, डिजिटल शिक्षा, शोध पद्धति तथा नवाचार आधारित शिक्षण प्रणाली से जोड़ना है, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुरूप टीएमबीयू में शिक्षकों के लिए नियमित अंतराल पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय के सभी विभागों और संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक भाग लेंगे। इसके लिए विशेषज्ञ शिक्षाविदों, राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञों और विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसरों को आमंत्रित किया जाएगा।
शिक्षकों को आधुनिक तकनीक से किया जाएगा अपडेट
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षण, ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ाने, शोध कार्यों को बेहतर बनाने और अकादमिक उत्कृष्टता हासिल करने के लिए भी विशेष सत्र आयोजित होंगे।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था तेजी से बदल रही है। ऐसे में शिक्षकों का भी समय-समय पर प्रशिक्षित होना आवश्यक है। इससे न केवल शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मजबूत होगी।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप होगा प्रशिक्षण
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसमें मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा, शोध आधारित शिक्षण, स्किल डेवलपमेंट, इनोवेशन, स्टार्टअप संस्कृति, इंडस्ट्री-एकेडमिक सहयोग और परिणाम आधारित शिक्षा (Outcome Based Education) जैसे विषयों पर विशेष जोर रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षित होना सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में व्यावहारिक कार्यशालाओं, समूह चर्चा और प्रायोगिक गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा।
शोध संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
विश्वविद्यालय में लंबे समय से शोध गतिविधियों को और अधिक सक्रिय बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शोध, शोध पत्र लेखन, पेटेंट, परियोजना निर्माण, शोध अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशन जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यदि शिक्षक बेहतर शोध करेंगे तो इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। इससे विश्वविद्यालय की शोध रैंकिंग में भी सुधार होने की संभावना है।
डिजिटल शिक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
कोरोना महामारी के बाद डिजिटल शिक्षा का महत्व काफी बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म, वर्चुअल लैब, डिजिटल कंटेंट तैयार करना, वीडियो लेक्चर निर्माण, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) और मिश्रित शिक्षण (Blended Learning) पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके अलावा शिक्षकों को साइबर सुरक्षा, डेटा प्रबंधन और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की जानकारी भी दी जाएगी ताकि वे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर सकें।
राष्ट्रीय संस्थानों से लिया जाएगा सहयोग
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, आईआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, यूजीसी, एआईसीटीई तथा अन्य अकादमिक संस्थाओं से भी सहयोग ले सकता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है ताकि शिक्षकों को नवीनतम शैक्षणिक और शोध प्रवृत्तियों की जानकारी मिल सके।
सभी विभागों के शिक्षकों को मिलेगा लाभ
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल किसी एक संकाय तक सीमित नहीं रहेगा। विज्ञान, कला, वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन, शिक्षा, विधि और अन्य सभी विषयों के शिक्षक इसमें भाग ले सकेंगे। चरणबद्ध तरीके से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों को भी इस कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।
विद्यार्थियों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि जब शिक्षक नई तकनीकों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से प्रशिक्षित होंगे तो उसका सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। कक्षाओं में पढ़ाई अधिक प्रभावी होगी, शोध का माहौल बेहतर बनेगा, रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी भी मजबूत होगी।
इसके अलावा विद्यार्थियों में नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप की भावना विकसित करने के लिए भी शिक्षक बेहतर मार्गदर्शन दे सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरू की तैयारियां
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने, विशेषज्ञों की सूची बनाने और कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने का काम किया जा रहा है। जल्द ही कार्यक्रम की तिथि, अवधि और प्रतिभागियों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में आएगा सुधार
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम नियमित रूप से संचालित किया जाता है तो इससे टीएमबीयू में शैक्षणिक वातावरण और अधिक मजबूत होगा। शिक्षकों की दक्षता बढ़ेगी, शोध कार्यों में गुणवत्ता आएगी, विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिलेगी और विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।
लोकभवन के निर्देश के बाद टीएमबीयू में इस पहल की शुरुआत को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य केवल शिक्षकों को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि एक ऐसी शैक्षणिक संस्कृति विकसित करना है जिसमें नवाचार, शोध, तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को समान रूप से बढ़ावा मिले। इससे आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक पहचान और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।