सांप्रदायिक सौहार्द और सुरक्षा के लिए बिजली विभाग का 'इमरजेंसी शटडाउन'; ताजिया के ऊंचे जुलूसों के कारण काटी गई बिजली, पानी के लिए मचा हाहाकार!
उत्तर बिहार की अघोषित राजधानी मुजफ्फरपुर में मुहर्रम (यौम-ए-आशूरा) का त्योहार जहां एक ओर भारी सुरक्षा और शांतिपूर्ण माहौल के बीच संपन्न हुआ, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन और बिजली विभाग के एक एहतियाती फैसले ने पूरे शहर को भीषण गर्मी और उमस के बीच 'पावरलेस' कर दिया। मुहर्रम के पारंपरिक जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने और किसी भी अप्रिय हादसे को टालने के लिए नॉर्थ बिहार पावर डिीट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) ने शहर और ग्रामीण इलाकों के कई प्रमुख 11 केवी (KV) फीडरों को अस्थायी रूप से पूरी तरह बंद (Shutdown) कर दिया।
विभाग का यह फैसला सुरक्षा के दृष्टिकोण से जितना जरूरी था, आम नागरिकों के लिए उतना ही कष्टदायक साबित हुआ। पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार होने के कारण घरों में कैद लोग बिना पंखे, कूलर और एसी के पूरी तरह उबल गए। घंटों बिजली गुल रहने के कारण शहर के बड़े हिस्से में पीने के पानी (Water Crisis) के लिए भी हाहाकार मच गया।
सुरक्षा की मजबूरी: आखिर क्यों बंद करने पड़े 11 केवी फीडर?
मुजफ्फरपुर में मुहर्रम के दौरान निकलने वाले ताजिया और अखाड़े के जुलूसों की ऊंचाई काफी ज्यादा होती है। शहर के कई पुराने और संकरे मोहल्लों में बिजली के 11 केवी और एलटी (LT) तार काफी नीचे लटके हुए हैं।
करंट फैलने का था खतरा: यदि जुलूस के दौरान कोई ऊंचा ताजिया या लोहे का अखाड़ा पाइप इन चालू हाई-टेंशन तारों के संपर्क में आ जाता, तो पूरे जुलूस में करंट फैल सकता था, जिससे सैकड़ों जानें जा सकती थीं।
एहतियातन 'ब्लैकआउट' का फैसला: इसी ऐतिहासिक और संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर बिजली विभाग के अभियंताओं ने उन सभी रूटों के फीडरों की बिजली पूरी तरह काट दी, जहां-जहां से जुलूस को गुजरना था।
इन इलाकों में बत्ती गुल: शहर का बड़ा हिस्सा रहा प्रभावित
शुक्रवार सुबह 10 बजे से लेकर देर शाम तक शहर के कम से कम एक दर्जन से अधिक फीडर पूरी तरह ठप रहे। इसके कारण करीब 3 से 4 लाख की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई।
प्रभावित मुख्य फीडर और मोहल्ले: चंदवारा फीडर, सिकंदरपुर फीडर, मिठनपुरा फीडर, सरायगंज, कल्याणी, इमलीचट्टी, कंपनी बाग, सूतापट्टी और ब्रह्मपुरा समेत कई इलाकों में करीब 6 से 8 घंटे तक लगातार बिजली गायब रही।
इन्वर्टर भी बोल गए 'गुडबाय': आम दिनों में आधे-एक घंटे के पावर कट को तो लोग इन्वर्टर के सहारे झेल लेते हैं, लेकिन इस बार उमस इतनी भीषण थी कि दोपहर होते-होते अधिकांश घरों के इन्वर्टर भी डिस्चार्ज हो गए एक नज़र में: मुहर्रम शटडाउन का पूरा गणित
| शटडाउन का कारण | सुरक्षा कारणों से (ताजिया जुलूस के रूट पर) |
|---|---|
| प्रभावित इंफ्रास्ट्रक्चर | दर्जनों 11 KV और 33 KV फीडर |
| औसत पावर कट का समय | 6 से 9 घंटे (अलग-अलग क्षेत्रों के रोटेशन के आधार पर) |
| सबसे बड़ी समस्या | बिजली न होने से वाटर पंप बंद, पीने के पानी की किल्लत |
| प्रशासनिक एक्शन | जुलूस खत्म होने के तुरंत बाद पेट्रोलिंग कर लाइन चालू की गई |
उमस और पानी की किल्लत: लोगों का फूटा गुस्सा
इस आपातकालीन बिजली कटौती ने आम जनता की परीक्षा ले ली। शुक्रवार को मुजफ्फरपुर का तापमान आसमान छू रहा था, ऊपर से हवा का बिल्कुल न चलना कोढ़ में खाज साबित हुआ।
घरों में दम घुटने जैसी स्थिति: छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समय काटना किसी टॉर्चर से कम नहीं था। लोग छतों पर और पेड़ों की छांव में हाथ के पंखे हिलाते नजर आए।
पानी के लिए मची त्राहि-त्राहि: दोपहर की नमाज और घरेलू कामकाज के समय पानी की टंकियां पूरी तरह खाली हो चुकी थीं। बिजली न होने के कारण बोरिंग और वॉटर पंप शो-पीस बन गए। कई मोहल्लों में लोगों को दूर-दराज के चापाकलों से बाल्टियों में पानी ढोना पड़ा।
बिजली ऑफिस के फोन रहे व्यस्त: परेशान उपभोक्ताओं ने जब कल्याणी और मिश्कॉट पावर हाउस के कंट्रोल रूम में फोन लगाना शुरू किया, तो या तो लाइन व्यस्त मिली या अधिकारियों ने सुरक्षा का हवाला देकर फोन काट दिया, जिससे जनता का गुस्सा और भड़क गया।
"सुरक्षा सर्वोपरि, जनता का सहयोग सराहनीय" — बिजली विभाग
विद्युत कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जनता से धैर्य रखने की अपील की थी। उन्होंने देर शाम जारी एक बयान में कहा:
"हम समझते हैं कि भीषण गर्मी में बिना बिजली के रहना बेहद कठिन है, लेकिन हमारे लिए इंसानी जान की सुरक्षा सबसे पहले है। ताजिया की ऊंचाई को देखते हुए 11 केवी की चालू लाइन से बड़ा हादसा हो सकता था। हमारी टीमें हर अखाड़े के गुजरने के बाद पीछे से लाइन को धीरे-धीरे रीस्टोर (बहाल) कर रही थीं। शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार संपन्न कराने में मुजफ्फरपुर की जनता का सहयोग सराहनीय रहा।"
शाम को जुलूस खत्म होने के बाद लौटी 'रोशनी'
जैसे ही शाम को सभी ताजिया सुरक्षित रूप से स्थानीय कर्बला मैदानों में पहुंचे और जुलूस का रूट खाली हुआ, बिजली विभाग के लाइनमैन और जूनियर इंजीनियरों की टीम ने ग्राउंड पर जाकर तारों का मुआयना किया। यह सुनिश्चित करने के बाद कि कहीं कोई तार टूट कर नहीं गिरा है, बारी-बारी से सभी 11 KV फीडरों को चार्ज किया गया। रात करीब 8:30 बजे तक शहर के 90% इलाकों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह बहाल कर दी गई, जिसके बाद जाकर शहरवासियों ने चैन की सांस ली।
मुजफ्फरपुर में मुहर्रम पर की गई यह बिजली कटौती सुरक्षा के लिहाज से एक अनिवार्य कड़वी दवा थी। हालांकि विभाग को चाहिए था कि वह पानी की समस्या से निपटने के लिए पहले ही समय सारणी (Time Table) जारी कर देता ताकि लोग पानी का स्टॉक कर लेते। बहरहाल, बिजली विभाग की इस मुस्तैदी और जनता के भारी त्याग के कारण मुहर्रम का यह बड़ा त्योहार बिना किसी शॉर्ट-सर्किट या अप्रिय हादसे के शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। नफरत और अव्यवस्था के दौर में, मुजफ्फरपुर ने एक बार फिर संयम और सुरक्षा की मिसाल पेश की!