बाढ़ में कूड़ेदान के अंदर मिला नवजात का शव, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

 पटना जिले के बाढ़ नगर परिषद क्षेत्र से एक बेहद शर्मनाक और हृदय विदारक घटना सामने आई है। नगर परिषद के वार्ड संख्या 21 स्थित एक कूड़ेदान में मंगलवार को एक नवजात शिशु का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। इस घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया है और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।

घटना का विवरण: सफाई कर्मियों की नजर पड़ी, तब हुआ खुलासा

घटना की जानकारी तब हुई जब नगर परिषद के सफाई कर्मचारी वार्ड संख्या 21 में कचरा उठाने के लिए पहुंचे। कूड़े के ढेर की सफाई करते समय एक कर्मचारी की नजर कचरे के बीच पड़ी एक संदिग्ध वस्तु पर गई। पास जाकर देखने पर पता चला कि वह एक नवजात शिशु का शव था, जिसे किसी ने लावारिस हालत में वहां फेंक दिया था।

सफाई कर्मियों ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय लोगों को दी। देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई। लोग इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाने लगे। बच्चे को इस हालत में देखकर वहां मौजूद महिलाओं और स्थानीय निवासियों की आंखें नम हो गईं।

अज्ञात नवजात: पहचान बनी रहस्य

शव के मिलने के बाद भी बच्चे की पहचान करना संभव नहीं हो पाया। अब तक किसी भी अस्पताल या स्थानीय निवासी की ओर से इस तरह की कोई सूचना नहीं मिली है, जिससे बच्चे के माता-पिता या उसे फेंकने वाले के बारे में पता चल सके। यह स्पष्ट है कि किसी ने सामाजिक बदनामी या अन्य कारणों से इस मासूम की जिंदगी को कूड़ेदान में फेंक दिया।

पुलिस की विवादित भूमिका: बिना पोस्टमार्टम शव का निस्तारण

इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा पुलिस की कार्रवाई को लेकर हो रही है। घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में तो लिया, लेकिन नियमानुसार पोस्टमार्टम कराने के बजाय आनन-फानन में उसे ठिकाने लगा दिया।

स्थानीय लोगों का विरोध: लोगों का कहना है कि पुलिस को कम से कम शव का पोस्टमार्टम कराना चाहिए था ताकि यह पता चल सके कि बच्चा जन्म के समय जीवित था या मृत, और मौत की असली वजह क्या थी।

प्रशासनिक लापरवाही: बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या जांच के शव का निस्तारण कर देने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पुलिस मामले को रफा-दफा करना चाहती थी?

समाज में नैतिकता का गिरता स्तर

बाढ़ की इस घटना ने समाज के एक कड़वे सच को उजागर किया है। एक नवजात को जन्म लेते ही कूड़ेदान में फेंक देने की यह घटना दिखाती है कि किस तरह से मानवीय संवेदनाएं खत्म हो रही हैं।

सामाजिक दबाव: अवैध संबंध या अवांछित गर्भ के कारण अक्सर महिलाएं ऐसी घटनाओं को अंजाम देने पर मजबूर होती हैं।

जागरूकता की कमी: सरकारी अस्पतालों और आश्रमों में नवजात को सुरक्षित रखने के लिए 'पालना' (Cradle) जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन लोगों में इन सेवाओं के प्रति जागरूकता का भारी अभाव है।

क्षेत्र में आक्रोश और सुरक्षा के सवाल

वार्ड संख्या 21 के निवासियों ने इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन से सीसीटीवी कैमरों की जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था सख्त होती और कूड़ेदानों के आसपास नियमित निगरानी रहती, तो शायद ऐसी घिनौनी हरकत करने वालों के हौसले पस्त होते। स्थानीय वार्ड पार्षद ने भी नगर परिषद से कूड़ेदानों की सफाई और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।

बाढ़ की यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए एक गहरा कलंक है। एक मासूम, जिसने अभी दुनिया देखी भी नहीं थी, उसे इस तरह से फेंक देना किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय है। पुलिस की संदिग्ध भूमिका भी इस मामले को और अधिक गंभीर बनाती है। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाए और दोषियों की पहचान के लिए गहन जांच करे। साथ ही, समाज को भी जागरूक होने की आवश्यकता है ताकि किसी और मासूम को कूड़ेदान की भेंट न चढ़ना पड़े।