भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बड़ा बयान, बोले- 'अगर कोई हम पर रिवॉल्वर तानेगा तो क्या हम उसे छोड़ देंगे?'
आरा/पटना। भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस या किसी अन्य पर हथियार तानता है, तो ऐसी स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई होना स्वाभाविक है। उनके बयान के बाद एक बार फिर यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी पुलिसकर्मी या किसी अन्य नागरिक पर रिवॉल्वर तान देता है, तो क्या उसे बिना कार्रवाई के छोड़ दिया जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और यदि किसी स्थिति में पुलिस पर जानलेवा हमला होता है, तो पुलिस अपनी सुरक्षा और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करने के लिए बाध्य होती है।
भरत तिवारी एनकाउंटर पर जारी है बहस
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति में लगातार बयान सामने आ रहे हैं। विपक्षी दल इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार और पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून के दायरे में की गई है।
इसी बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बयान सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। उनके बयान को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
"पुलिस पर हमला होगा तो कार्रवाई होगी"
मीडिया से बातचीत के दौरान जीतन राम मांझी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुलिसकर्मियों पर हथियार तानता है या जानलेवा हमला करता है, तो पुलिस हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकती। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में पुलिस को अपनी सुरक्षा और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का पालन सर्वोपरि है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
"पुलिस मारी जाए तो अच्छा, लेकिन..."
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग ऐसी बातें करते हैं मानो पुलिसकर्मी की जान की कोई कीमत नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह उचित होगा कि पुलिस पर हमला हो और पुलिस केवल तमाशा देखती रहे?
उन्होंने कहा कि यदि कोई आम नागरिक घायल होता है या उसकी जान जाती है तो यह भी दुखद है, लेकिन यदि पुलिसकर्मियों पर हमला किया जाए तो उनकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस और आम नागरिक दोनों की जान समान रूप से मूल्यवान है।
कानून के शासन पर दिया जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में संविधान और कानून का शासन है। किसी भी विवाद या आपराधिक मामले का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से बचें और किसी भी संवेदनशील मामले में जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष पर न पहुंचें।
उन्होंने कहा कि यदि किसी कार्रवाई पर किसी को आपत्ति है तो उसके लिए न्यायालय और अन्य कानूनी मंच उपलब्ध हैं, जहां अपनी बात रखी जा सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
मांझी के बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ नेताओं ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पुलिस पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं कुछ विपक्षी नेताओं ने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग दोहराई और कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भरत तिवारी एनकाउंटर अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है।
पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस पहले ही अपनी कार्रवाई को कानूनसम्मत बता चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यदि किसी स्तर पर अतिरिक्त जांच की आवश्यकता होगी तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले से जुड़ी अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न किया जाए और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा किया जाए।
सोशल मीडिया पर भी जारी है बहस
मांझी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में सोशल मीडिया पर तथ्यहीन या भड़काऊ सामग्री साझा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
जनता की नजर जांच पर
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर अब लोगों की नजर आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है। आम लोगों का मानना है कि मामले के सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो।
फिलहाल केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई दोनों पर सबकी नजर बनी रहेगी।